शहर में जगह- जगह चौराहों, तिराहों व सड़क किनारे अवैध होर्डिंगों की भरमार हो चुकी है। यह अवैध होर्डिंग जहां एक ओर शहर की सूरत को बदरंग किए हुए हैं। वहीं नगर पालिका को भी हजारों रुपये का चूना लगा रहे हैं। उधर बिना मानक से मनमाने रूप से लगाए गए होर्डिंग शहर की यातायात व्यवस्था को बिगाड़े हुए हैं।
शहर में विद्यालय हों या राजनैतिक दल या फिर कोई कोचिंग सेंटर सभी ने अपने प्रचार- प्रसार का सरल और सीधा रास्ता अपना रखा है। यही कारण है कि आज शहर में जहां देखो बल्लियों पर बिना निर्धारित भुगतान के लगाए गए भारी भरकम होर्डिंग नगर पालिका प्रशासन को मुंह चिढ़ा रहे हैं। इनमें से कुछ होर्डिंग विभिन्न कंपनियों के प्रोडक्ट का प्रचार कर रहे हैं।
वहीं कई विभिन्न स्कूलों, क ोचिंग सेंटरों व राजनैतिक दलों क ी मुफ्त में गाथाएं गा रहे हैं। ऐसा नहीं कि इन होर्डिगों के बारे में नगर पालिका प्रशासन को जानकारी नहीं हो, लेकिन इसके बाद भी अभी तक इन होर्डिंगों को हटवाए जाने के लिए कोई कड़ा कदम नहीं उठाया गया है।
नियमों को ताक पर रखकर लगाए गए अवैध होर्डिंग- इटावा। शहर में जगह- जगह अवैध रूप से लगाए गए होर्डिंग पूरी तरह से मानक और नियम कायदों को ताक पर रखकर खडे़ किए गए हैं। कई स्थानों पर तो होर्डिंग सड़क के किनारे इतनी निचाई पर लगे हैं कि अगर फु टपाथ पर चलने वाले राहगीर का जरा ध्यान भटक जाए तो वह इससे टकराकर चोटिल हो सकते हैं। वहीं ऊंची इमारतों पर लगाए गए होर्डिंगों को लगाते समय भी मानकों का कोई ध्यान नहीं रखा गया है।
वह स्थान जहां पर है अवैध होर्डिंगों की भरमार- इटावा। शहर में वैसे तो जगह- जगह अवैध रूप से लगाए गए होर्डिंग व बैनर नजर आते हैं, लेकिन शास्त्री चौरहा, तिकोनिया, जीआईसी स्कूल के सामने, एसएसपी चौरहा, डीएम चौराहा, सेंट मेरी इंटर कालेज के सामने, गुरू तेग बहादुर ओवर ब्रिज, बीएसए कार्यालय के सामने पक्का बाग आदि क्षेत्र पर इनकी भरमार है। शास्त्री चौराहे पर किस कदर प्रचार का साधन बनाया जा चुका है, इसका अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि यहां लगी शास्त्री जी की मूर्ति भी चारों-ओर से प्रचार सामग्री से ढक दी गई है।