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मुलायम सिंह का सैफई ब्लाक हुआ अनारक्षित, प्रधान बनेगा एससी

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इटावा। हाईकोर्ट के आदेश के बाद 2015 को आधार मानकर चक्रानुक्रम आरक्षण प्रक्रिया के तहत सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव के सैफई ब्लॉक की सीट अनारक्षित की श्रेणी में आ गई है। अब उनके परिवार का सदस्य दावेदारी कर सकेगा। इससे पहले दो मार्च को घोषित हुए आरक्षण में यह सीट अनुसूचित जाति की महिला के लिए आरक्षित कर दी गई थी। हालांकि मुलायम के गांव में पहली बार एससी प्रधान बनेगा।
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इटावा में वर्ष 1989 से 2021 तक जिला पंचायत अध्यक्ष की सीट पर सपा ही काबिज रही है। उसमें भी पिछले 15 सालों से मुलायम सिंह के परिवार के व्यक्ति के पास ही जिले के प्रथम नागरिक का औहदा पाता रहा है। वहीं, छह ब्लाकों पर सपा का ही परचम लहराता रहा। इस बार भी जिला पंचायत अध्यक्ष की सीट पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित की गई है। यहां मुलायम सिंह यादव के भतीजे अभिषेक यादव उर्फ अंशुल लगातार दूसरी बार मैदान में हैं।
इस महीने पंचायत चुनावों को लेकर राजनैतिक परिदृश्य तेजी से बदला। दो मार्च को जारी हुई आरक्षण की अनंतिम सूची में जिला पंचायत अध्यक्ष की सीट तो ओबीसी के लिए ही आरक्षित रही। परंतु मुलायम सिंह यादव के गांव सैफई की ब्लाक प्रमुखी और प्रधानी की सीट अनुसूचित जाति की महिला के लिए आरक्षित कर दी गई। प्रधानी की कोई बात नहीं परंतु ब्लाक प्रमुखी की सीट पर पिछले 25 सालों से मुलायम परिवार का ही कब्जा रहा है। पूर्व में जारी हुए आरक्षण से यह क्रम टूट सकता था। परंतु हाईकोर्ट के आदेश पर आरक्षण की की नई नीति लागू हुई। शनिवार को जारी हुई पंचायत चुनावों के आरक्षण की अनंतिम सूची में सैफई अनारक्षित की गई है।
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वर्ष 1995 से रहा है परिवार का कब्जा
सैफई ब्लाक अस्तित्व में आने के बाद पहली बार हुए क्षेत्र पंचायत के चुनाव में मुलायम के भतीजे रणवीर सिंह यादव पहले ब्लाक प्रमुख बने। 2005 में उनके निधन के बाद दूसरे भतीजे धर्मेंद्र यादव ब्लाक प्रमुख हुए। 2010 में स्व रणवीर सिंह के पुत्र तेज प्रताप सिंह यादव ब्लाक प्रमुख बने। 2015 में स्व रणवीर सिंह यादव की धर्मपत्नी मृदुला यादव ब्लाक प्रमुख बनीं। तीन दिन पहले ही उनका कार्यकाल खत्म हुआ है।
जिला पंचायत पर 89 से रहा है कब्जा
इटावा। इटावा जिला पंचायत अध्यक्ष पर 1989 से सपा का कब्जा रहा है। 89 में सपा के राष्ट्रीय महासचिव प्रो रामगोपाल यादव जिला पंचायत अध्यक्ष बने थे। इसके बाद 1994 में सपा के राम सिंह शाक्य, 1996 में शिवपाल सिंह यादव, 1996 में ही महेंद्र सिंह राजपूत, 2000 में प्रेम दास कठेरिया, 2006 और 2011 में प्रेमलता यादव, 2016 में अभिषेक उर्फ अंशुल यादव पंचायत अध्यक्ष बने।
प्रधानी की सीट एससी को
प्रदेश भर में चर्चित रही सैफई सीट को इस बार अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित किया गया है। यह सीट कभी इस वर्ग के लिए आरक्षित नहीं रही। यहां लगातार मुलायम सिंह यादव के बालसखा दर्शन सिंह यादव निर्विरोध प्रधान निर्वाचित होते रहे। अब दर्शन सिंह का निधन हो चुका है। इसलिए सैफई की प्रधानी पहली बार दर्शन सिंह यादव के बिना तय की जाएगी।
ब्लाक प्रमुखी में दबदबा कायम रखना बनेगा चुनौती
अभी तक इटावा जिले के आठ में से छह ब्लाकों में सपा का दबदबा कायम रहा है। इस बार भाजपा पंचायत चुनावों को बड़ी मजबूती से लड़ रही है। ब्लाक प्रमुखी में दबदबा कायम रख पाना एक बड़ी चुनौती साबित होगा। भरथना में पूर्व सांसद प्रदीप यादव का एकाधिकार इस बार टूटेगा। भरथना की सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित कर दी गई है।
वहीं जसवंतनगर में प्रसपा नेता प्रो ब्रजेश यादव को अपना एकाधिकार कायम रखने के लिए कड़ा संघर्ष करना होगा। एक बार सीट आरक्षित होने के क्रम को छोड़ दें तो यहां प्रो ब्रजेश यादव अथवा उनके परिवार का ही कोई न कोई ब्लाक प्रमुख बनता आ रहा है। इस बार यह सीट महिला के लिए आरक्षित की गई है। इसलिए उनके लिए अपना एकाधिकार कायम रखना आसान हो सकता है।
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