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शहर में बनेगा अल्पसंख्यक बालिका विद्यालय

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इटावा। जीआईसी के पुराने भवन के खंडहरों को तोड़कर अल्पसंख्यक बालिकाओं के लिए विद्यालय बनाया जाएगा। इसके लिए केंद्र सरकार ने चार करोड़ से अधिक की मंजूरी भी मिल चुकी है। जीआईसी में भूमि और नए नक्शे को मंजूरी के लिए यूपीआरएनएसएस ने शासन को भेज दिया है।
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जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी प्रशांत कुमार ने बताया कि प्रधानमंत्री विकास कार्यक्रम के तहत जिले को अल्पसंख्यक बालिका विद्यालय मिला है। अल्पसंख्यक विद्यालय बनाने के लिए संबंधित क्षेत्र में अल्पसंख्यकों की फीसदी आबादी होना जरूरी है। आबादी का ये प्रतिशत केवल जनपद में इटावा शहर में ही है। उन्होंने बताया कि बालिका विद्यालय कक्षा छह से 12 तक की पढ़ाई होगी। प्रशांत कुमार ने बताया कि विद्यालय जिले को पिछले साल मिला था। केंद्र सरकार ने 4 करोड़ 18 लाख रुपये भी भवन के लिए जारी कर दिए हैं। निर्माण की जिम्मेदारी यूपीआरएनएसएस को दी गई है। पहले स्कूल बाइस ख्वाजा के पास जमीन विद्यालय के लिए प्रस्तावित की गई थी, लेकिन वक्फ संपत्ति का विवाद होने के कारण वहां विद्यालय भवन नहीं बन पाया। अब जीआईसी परिसर में विद्यालय बनाया जाएगा। हर्षनगर छोर पर जीआईसी के पुराने भवन के खंडहर को तोड़कर अल्पसंख्यक विद्यालय का भवन बनाया जाएगा।
कार्यदायी संस्था यूपीआरएनएसएस के एक्सईएन अरविंद कुमार ने बताया कि मानक के अनुसार विद्यालय भवन के लिए तीन हजार वर्गमीटर भूमि चाहिए। शहर के अंदर और आबादी के करीब इतनी भूमि पिछले एक साल में नहीं मिल पाई है। जीआईसी में जो जगह मिल रही है वह कम और त्रिकोण में है। पीछे का हिस्सा चौड़ा और आगे का संकरा है। इसके चलते भूमि और भवन करा नया नक्शा बनाकर प्रदेश सरकार के माध्यम से केंद्रीय अल्पसंख्यक मंत्रालय को भेज दिया गया है। जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी ने कहा कि भवन आबादी के आसपास ही बनाया जाना है जिससे की बालिकाएं आसानी से पहुंच सकें। जीआईसी में कुछ जगह कम है लेकिन जो नक्शा भेजा गया है, उसे जल्द ही उम्मीद मिल जाएगी।
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जीआईसी में बनेगा हॉल और बाउंड्रीवाल
जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी प्रशांत कुमार ने बताया कि शहर के जीआईसी की बाउंड्रीवाल बनाई जाएगी। इसके अलावा एक मल्टीपर्पज हॉल, प्रयोगशाला, पुस्तकालय भवन बनाने के लिए ढाई करोड का प्रस्ताव भेजा गया है।
बजट के अभाव में अधूरे पड़े अतिरिक्त कक्ष
जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी प्रशांत कुमार ने करीब चार साल पहले एमएसडी योजना के तहत जीआईसी में आठ अतिरिक्त कक्षों का निर्माण शुरू कराया गया था। इन कमरों का आधा निर्माण हो चुका है। पहली किस्त में मिले 23.06 लाख रुपये खर्च हो चुके हैं। इसके बाद आगे का पैसा नहीं आया। इससे निर्माण कार्य अधूरा पड़ा है। उन्होंने बताया कि कक्षों का निर्माण पूरा कराने के लिए 23.06 लाख रुपये की और आवश्यकता है।
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