फोटो: 24 खेत में खुदाई के बाद आलू की छंटाई करते किसान
ताखा। क्षेत्र में इस साल आलू किसानों की स्थिति बेहद चिंताजनक बनी हुई है। क्षेत्र में करीब दो हजार हेक्टेयर भूमि पर आलू की खेती की जाती है लेकिन इस बार किसानों को दोहरी मार झेलनी पड़ रही है। एक ओर बाजार में आलू के भाव कम हैं, वहीं दूसरी ओर पैदावार में आई गिरावट ने किसानों की कमर तोड़ दी है। ऐसे में किसानों के सामने आर्थिक खड़ा होता दिखाई दे रहा है।
किसानों का कहना है कि इस साल आलू की पैदावार पिछले साल की तुलना में पांच से दस पैकेट प्रति बीघा तक कम निकली है। पिछले वर्ष खेत से आलू की भराई के लिए मजदूरी की दर 300 रुपये प्रतिदिन थी, जो इस बार बढ़कर 350 रुपये हो गई है। इसके अलावा बारदाना, भाड़ा और कोल्ड स्टोरेज का किराया भी बढ़ गया है।
पिछले वर्ष कोल्ड स्टोरेज का किराया 270 रुपये प्रति क्विंटल था, जो इस साल बढ़कर 280 रुपये प्रति क्विंटल हो गया है। परिवहन खर्च और अन्य सहायक लागतों में भी वृद्धि हुई है। ऐसे में किसानों की लागत लगातार बढ़ती जा रही है। वहीं बाजार में आलू का भाव 400 से 600 रुपये प्रति क्विंटल के बीच चल रहा है, जो लागत निकालने के लिए भी पर्याप्त नहीं माना जा रहा।
गांव बछरोई निवासी किसान पुष्पेंद्र का कहना है कि उन्होंने ब्याज पर रुपये लेकर आलू का बीज लिया था और खेत पर भी काफी खर्च हुआ। अब आलू के उचित दाम नहीं मिल पा रहे हैं। इससे उसे चिंता सता रही है कि वह कहीं कर्ज में न डूब जाए।
रुद्रपुर निवासी किसान राजेश गुप्ता का कहना है कि मौसम की मार के कारण इस बार आलू की प्रति बीघा उपज काफी कम हुई है। दूसरी ओर बाजार भी हल्का है। इस दोहरी मार से उनकी अर्थ व्यवस्था गड़बड़ा गई है।