बकेवर। जनता कॉलेज बकेवर में कृषि विभाग और कृभको के तत्वावधान में हुई फसल संगोष्ठी में किसानों को फसलों के संबंध में नई तकनीक से कम लागत में खेतीबाड़ी की जानकारियां दी गई। इस मौके पर भारी संख्या में किसान मौजूद थे।
मुख्य अतिथि जिला कृषि अधिकारी अभिनंदन सिंह ने कहा कि कृषि विभाग से संबंधित योजनाओं का किसान लाभ लेकर खेती की लागत घटाएं और उत्पादन अधिक लें। बीज भंडारों में 50 फीसदी अनुदान पर बीज उपलब्ध कराया जाता है।
जैविक खादों का ज्यादा और रासायनिक खादों का कम प्रयोग करे। कृषि यंत्र भी 50 फीसदी छूट पर उपलब्ध कराए जाते हैं। डॉ. डीएन सिंह ने सरसों में कीट प्रबंधन पर व्याख्यान प्रस्तुत किया, जिसमें सरसों के मुख्य कीट माहू का समन्वित नियंत्रण डिस्प्ले से किसानों को समझाया।
डॉ. एमपी सिंह ने खरपतवार प्रबंधन की यांत्रिक, रासायनिक विधियों का समन्वित तरीका बताया। डॉ. मनोज यादव ने पादप रोगों के एकीकृत प्रबंधन के बारे में जानकारी दी।
इसके पूर्व जिला कृषि अधिकारी ने मां सरस्वती की प्रतिमा पर दीप जलाकर कार्यक्रम की शुरुआत की। उद्यान विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. एके पांडेय ने कॉलेज की प्रस्तावना पेश की।
कृभको के वरिष्ठ क्षेत्रीय प्रबंधक डॉ. आरएस तोमर ने बताया कि कृभको संपूर्ण देश को जैविक एवं रासायनिक उर्वरक उपलब्ध कराती है। किसानों को समन्वित पोषक तत्व प्रबंधन के तहत फसलों को तत्वों की आपूर्ति करनी चाहिए।
संयुक्त सचिव डॉ. अभिषेक प्रताप सिंह ने कई योजनाओं की जानकारी दी। कृभको के क्षेत्रीय प्रबंधक नरेंद्र सिंह ने सभी का स्वागत प्रतीक चिन्ह भेंट कर किए। कॉलेज के प्राचार्य डॉ. राजेश किशोर त्रिपाठी ने धन्यवाद ज्ञापन किया।
कॉलेज के छात्र-छात्राओं द्वारा लगाए गए मॉडल की सराहना की। संगोष्ठी की अध्यक्षता आर्थिक शोध संस्थान प्रयागराज के निदेशक प्रोफेसर जगदीश नारायण ने की।
इस मौके पर अमर सिंह, लालाराम दोहरे, सुनील कुमार सिंह, राजेंद्र त्रिपाठी, कृष्ण सिंह, दयाराम मिश्र, पुष्पा तिवारी, राहुल, कमलेश चतुर्वेदी, नरसिंह, असित कुमार, ध्यान सिंह यादव, सीताराम, श्यामसुंदर और गणेश पाठक को सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम में वरिष्ठ प्राध्यापक डॉ. एमपी यादव, डॉ. पीके राजपूत, डॉ. संतोष चंदेल, डॉ. आनंद सिंह, डॉ. आदित्य कुमार, डॉ. संजीव कुमार, डॉ. संजय विश्वकर्मा, डॉ. चंदेल डॉ. गोपीनाथ मौर्य, रत्ना शुक्ला, मीनू त्रिपाठी, आकाश चौधरी, अनिल कुमार, शैलेंद्र आदि मौजूद रहे। संचालन डॉ. मनोज यादव ने किया।