फोटो 36: कोठी चंदनपुर में कथाएं सुनतीं महिला श्रद्धालु। संवाद
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इकदिल। कोठी चंदनपुर के बीच स्थित शाला आश्रम पर आयोजित कथा के सातवें दिन श्रीराम कथा में कथा व्यास अरुणोदय जी महाराज ने भगवान श्रीराम के वनवास प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम ने माता-पिता के वचनों की मर्यादा बनाए रखने के लिए राजपाट का त्याग कर वनवास जाना स्वीकार किया। पिता की आज्ञा का पालन करते हुए उन्होंने राजमहल के सुखों को छोड़कर वन का कठिन मार्ग चुना। उनका जीवन त्याग,आज्ञाकारिता और आदर्शों का प्रतीक है।
कथा व्यास ने कहा कि भगवान श्रीराम का चरित्र प्रत्येक व्यक्ति को माता-पिता का सम्मान करने और अपने कर्तव्यों का पालन करने की प्रेरणा देता है। श्रीराम ने अपने आचरण से यह संदेश दिया कि जीवन में परिस्थितियां कैसी भी हों, सत्य, मर्यादा और वचन का पालन सर्वोपरि होना चाहिए।
राम वनवास का प्रसंग सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो गए और भगवान श्रीराम के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाने का संकल्प लिया। श्रीराम कथा सुनने के लिए क्षेत्र के गांवों से बड़ी संख्या में महिला और पुरुष श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। कथा के दौरान पूरा वातावरण भक्तिमय बना हुआ है।
कथा के परीक्षित मुन्नी अपनी पत्नी सहित नियमित रूप से कथा श्रवण कर रहे हैं। आयोजन को व्यवस्थित रूप से संपन्न कराने के लिए योगेश तोमर, वीएल शाक्य, चंद्रशेखर आदि व्यवस्थाओं की देखरेख कर रहे हैं।