लायन सफारी में ‘मौत’ का सन्नाटा छाया है। जिंदा बचे इकलौते शावक की भी शुक्रवार को मौत हो गई लेकिन अफसर अभी भी मुंह खोलने को तैयार नहीं हैं।
गौरतलब है कि मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के ड्रीम प्रोजेक्ट लायन सफारी को एक के बाद एक झटके लगते ही जा रहे हैं। पहले एक शेर व एक शेरनी की मौत से लॉयन सफारी को झटका लगा। इसके बाद एक के बाद एक पांच शावकों की मौत ने लॉयन सफारी को हिलाकर कर दिया है।
ईद के दिन 18 जुलाई को शेरनी हीर ने दो शावकों को जन्म दिया था लेकिन पैदा होने के कुछ घंटे बाद ही दोनों की मौत हो गई थी। इसके बाद 21 जुलाई को शेरनी ग्रीष्मा ने तीन शावकों को जन्म दिया।
पैदा होने के कुछ ही घंटों के बाद दो शावकों की मौत हो गई। इनमें इकलौते बचे शावक को बचाने के लिए शासन के साथ सफारी प्रशासन ने पूरी ताकत झोंक दी, लेकिन यह भी 24 दिन से ज्यादा नहीं जी सका।
स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर शुक्रवार की शाम इसकी मौत की भी खबर आ गई। हालांकि किसी अफसर ने इसकी पुष्टि नहीं की थी। आखिरी शावक की मौत की सूचना से लायन सफारी में हड़कंप की स्थिति रही।
पता चला है कि खुद मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने पूरे घटनाक्रम की जानकारी अफसरों से ली। मौत का कारण जानने के लिए शावक के शव को पोस्टमार्टम के लिए भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई) इज्जतनगर बरेली भेजा गया है।
वहीं शावक की मौत के बाद शासन के निर्देश पर शनिवार को प्रमुख सचिव वन संजीव शरन इटावा पहुंचे और पूरे मामले की जानकारी ली। वहीं प्रमुख वन संरक्षक रूपक डे पहले से ही लायन सफारी में डेरा डाले हुए हैं। हालांकि लॉयन सफारी से जुड़े अधिकारी पांचवें शावक की मौत के बाद से मीडिया से बचते रहे।
...और सारी कोशिशें फेल हो गईं
इटावा। लायन सफारी में चार शावकों की मौत के बाद जिंदा बचे इकलौते शावक को बचाने की हर संभव कोशिश की गई। देखभाल में कोई लापरवाही न हो जाए, इसे लेकर प्रमुख वन संरक्षक रूपक डे भी सफारी में डेरा जमाए हुए थे।
इतनी मशक्कत के बावजूद नतीजा सिफर रहा और शुक्रवार की शाम पांचवें शावक ने भी दम तोड़ दिया। शेरनी ग्रीष्मा ने 21 जुलाई को तीन बच्चों को जन्म दिया। पैदा होने के बाद इनमें से दो की मौत हो गई है लेकिन तीसरे की सांसें चल रही थीं। इसकी जान बचाने के लिए पूरा अमला जुट गया।
शावक को शेरनी का दूध नसीब नहीं हुआ तो सफारी प्रशासन ने फीडिंग के ऊपरी जतन शुरू किए। ग्रीष्मा शेरनी के खून का आधा एमएल सीरम शावक को पिलाया गया था। इतने ही एमएल सीरम का इंजेक्शन उसकी खाल में लगाया गया था। साथ ही उसे 36 घंटे पूर्व बच्चा देने वाली गाय का कोलस्ट्राल दिया गया।
यह सब रोगों से लड़ने की क्षमता विकसित करने के लिए किया गया। शावक की बेहतर देखभाल हो सके इसके लिए गुजरात से डा. कड़ीवाल को भी बुलाया गया। उनके टिप्स पर काम करते हुए डा. अरविंद त्रिपाठी शावक की देखभाल कर रहे थे। कुल मिलाकर शावक को जिंदा बचाने के लिए हरसंभव प्रयास हुए, लेकिन उसे बचाया नहीं जा सका।