विदेशी पूंजी के लिए दरवाजे खोलने से देश को घातक परिणाम भुगतने पड़ रहे हैं। लाखाें की संख्या में युवा बेरोजगार हो रहे हैं। मोदी ने रोजगार देने का वादा किया था, लेकिन सत्ता में आने के बाद कें द्र सरकार विदेशी ताकतों की गोद में बैठी नजर आ रही है। यह बात पूर्व सांसद सुभाषिनी अली ने डीबीए हाल में आयोजित माकपा के सेमीनार में मुख्य अतिथि के रूप में कही।
पूर्व सांसद ने कहा कि भूमि अधिग्रहण बिल का हर स्तर पर विरोध किया जाएगा क्याेंकि इससे किसान बर्बाद होने की कगार पर खड़ा हो जाएगा। उन्होंने कहा कि पूंजीवादी ताकतों से निपटने के लिए वामपंथ ही अंतिम विकल्प है। सांप्रदायिक ताकतों को मौका मिलने से देश की एकता तथा अखंडता के लिए खतरा पैदा हो रहा है।
उन्होंने कार्यकताओं का आह्वान किया कि देश को दिशा देने के लिए शक्तिशाली पार्टी का निर्माण करें। अध्यक्षता करते हुए कामरेड मुकुट सिंह यादव ने कहा कि प्रदेेश का किसान तबाही की कगार पर है लेकिन सपा सरकार ने किसानों के लिए मात्र 200 करोड़ का बजट रखा है।
किसानों को 10 हजार एकड़ का मुआवजा मिलना चाहिए। प्रदेश में कानून व्यवस्था चौपट हो चुकी है। महिलाआें की आबरू को खतरा पैदा हो रहा है। माकपा ने उक्त मांगोें को लेकर 2 जून को विधान सभा के घेराव का निर्णय लिया है। इसमें इटावा से बड़ी संख्या में किसान शामिल होंगे। इस अवसर पर पर अमर सिंह शाक्य, प्रेमशंकर यादव, अनिल दीक्षित, रामप्रकाश आदि सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ता उपस्थित थे।