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कुष्ठ रोग के इलाज में देरी से व्यक्ति को शारीरिक अपंगता

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सैफई। उप्र आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय सैफई के त्वचा विज्ञान विभाग ने ओपीडी में विश्व कुष्ठ दिवस मनाया। उद्घाटन चिकित्सा अधीक्षक डॉ. आदेश कुमार एवं कुलसचिव सुरेश चंद्र शर्मा ने किया।
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त्वचा विज्ञान विभाग से डॉ. श्वेता एस कुमार ने बताया कि डब्लूएचओ के अनुसार विश्व में तकरीबन दो लाख लोग प्रतिवर्ष कुष्ठ रोग से संक्रमित होते हैं। इस संख्या में लगभग 60 प्रतिशत यानि लगभग एक लाख बीस हजार मरीज भारत से हैं। सही समय पर इस रोग के लक्षणों की पहचान करके यदि इलाज किया जाए तो यह बीमारी पूरी तरह ठीक हो जाती है। चिकित्सा अधीक्षक डॉ. आदेश कुमार ने बताया कि कुष्ठ रोग के इलाज में देरी से व्यक्ति को शारीरिक अपंगता का शिकार होना पड़ सकता है। इसके साथ ही शरीर की तंत्रिकाएं भी स्थायी रूप से क्षतिग्रस्त हो सकती हैं। उन्होंने कहा कि कुष्ठ रोग का इलाज आज पूरी तरह संभव है। विश्व स्वास्थ्य संगठन से 1995 में विकसित मल्टी-ड्रग थेरेपी इस संक्रमण के इलाज में बेहद प्रभावी पाई गई है।
कुलसचिव सुरेश चंद्र शर्मा ने बताया कि कुष्ठ रोग का निशुल्क इलाज सभी स्वास्थ्य केन्द्रों एवं अस्पतालों में उपलब्ध है। इसके लिए आज भी व्यापक जागरूकता की आवश्यकता है। कार्यवाहक संकायाध्यक्ष डॉ. राजेश कुमार वर्मा, संकायाध्यक्ष छात्र कल्याण प्रकोष्ठ डॉ. आलोक कुमार दीक्षित, चीफ वार्डन डॉ.. एनपी सिंह, त्वचाविज्ञान विभाग से डॉ. प्रतीक जैन, डॉ. सुषमा आदि मौजूद रहे।
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