जयपुर से चलकर विभिन्न शहरों का भ्रमण करती हुई इटावा पहुंची श्रीकृष्ण प्रणामी धर्म जागृति यात्रा का भव्य स्वागत किया गया। यात्रियों को ठहराने की व्यवस्था परमानंद धाम इकदिल में की गई थी।
सदर विधायक रघुराज सिंह शाक्य ने भगवान कृष्ण की आरती उतारकर यात्रा का स्वागत किया। यात्रियाें को शाल ओढ़ाकर सम्मानित किया गया। यात्रा समापन 11 जून को जयपुर में किया जाएगा।
श्रीकृष्ण प्रणामी यात्रा के यहां पहुंचने पर शहर से इकदिल पहुंचकर सैकड़ाें लोगाें ने उसका स्वागत किया। शोभायात्रा के दौरान भक्ति में श्रद्धालु जमकर झूमे। इस मौके पर मुख्य यात्री राकेश सिडानी और ओम प्रकाश कटारिया ने बताया कि यात्रा का दूसरा चरण 23 मई को जयपुर से शुरू हुआ था। इसका समापन 11 जून को जयपुर में ही किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि यात्रा में 40 वाहनाें का काफिला शामिल है। यात्रा सीतामणि, उज्जैन, मंदसौर, अमरावती, रामनगर, महोवा, छतरपुर होते हुए इकदिल पहुंची है। अब आगरा, मथुृरा, वृंदावन, दिल्ली और भिवानी होते हुए जयपुर पहुंचेगी।
उन्होंने बताया कि यात्रा का मुख्य लक्ष्य एकता का संदेश देना है। सभी धर्मग्रंथ कहते हैं कि परमात्मा एक है जो सृष्टि का रचयिता है फिर ये अलगांव क्याें है। धर्म के नाम पर झगड़े क्यों हो रहे हैं। वेदो में भी कहा गया है कि एको ब्रह्म द्वितीयो नास्ति, गुरुनानक देव ने भी कहा है कि नानक एको सुमरिए।
कुरान में भी मुहम्मद साहब ने कहा कि अल्लाह एक है। बाइबिल में ईसा मसीह ने भी एक ही ईश्वर को माना है। श्री कृष्ण प्रणामी धर्म में एक परमात्मा को सच्चिदानंद स्वरूप कहा है। योग माया निर्मित रासमंडल में अक्षरातीत के आवेश की लीला मुख्य रही है। रासलीला के बाद सात दिन गोकुल में तथा चार दिन तक कृ ष्ण ने लीला की।