इटावा। आम जनता की शिकायतों के त्वरित निदान और आपातकालीन स्थितियों में संपर्क के लिए शासन ने अधिकारियों को दिए गए सरकारी (सीयूजी) नंबरों की हकीकत बेहद चौंकाने वाली है। शासन के सख्त निर्देशों के बावजूद जिले के जिम्मेदार अधिकारी इन नंबरों को लेकर कितने लापरवाह हैं, इसका खुलासा सोमवार को तब हुआ जब संवाद न्यूज एजेंसी की टीम ने रियलिटी टेस्ट किया। पड़ताल के दौरान विकास से लेकर स्वास्थ्य महकमे के सबसे बड़े साहब तक के सीयूजी नंबर या तो बिना जवाब दिए बजते रहे या फिर पूरी तरह बंद मिले। सबसे गंभीर बात यह रही कि कॉल कटने के घंटों बाद भी किसी भी अधिकारी ने पलटकर (बैक कॉल) फीडबैक लेने की जहमत नहीं उठाई।
जिले की विकास योजनाओं की कमान संभालने वाले सीडीओ अजय कुमार गौतम के सीयूजी मोबाइल नंबर पर जब टीम ने संपर्क साधने का प्रयास किया, तो घंटी बजती रही लेकिन फोन रिसीव नहीं हुआ। ग्रामीण क्षेत्रों में चल रही विकास योजनाओं या किसी आपातकालीन शिकायत के लिए अगर कोई ग्रामीण इस नंबर पर आस लगाए, तो उसे सिर्फ निराशा ही हाथ लगेगी।
जिले की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को पटरी पर रखने की जिम्मेदारी सीएमओ डॉ. ब्रजेंद्र सिंह पर है। उमस भरी गर्मी और मौसमी बीमारियों के इस दौर में जब स्वास्थ्य केंद्र अलर्ट पर होने चाहिए, तब सीएमओ साहब का सीयूजी नंबर दोपहर 03:47, 3:56 व 3:57 पर तीन बार फोन किया गया। अस्पताल की अव्यवस्था या किसी इमरजेंसी की सूचना देने के लिए आम जनता का इनके नंबर पर संपर्क कर पाना पूरी तरह मुहाल साबित हो रहा है।
ग्रामीण इलाकों के विकास और सीधे जनता से जुड़े ब्लॉक मुख्यालयों का हाल तो और भी बुरा है। बीडीओ बढ़पुरा के सीयूजी नंबर पर जब कॉल की गई, तो वह बंद मिला। सरकारी नंबर का बंद होना सीधे तौर पर शासन के उन आदेशों की धज्जियां उड़ाना है, जिसमें सीयूजी नंबर को 24 घंटे चालू रखने के निर्देश दिए गए हैं।
शासन का स्पष्ट नियम है कि यदि अधिकारी किसी अति-महत्वपूर्ण बैठक या फील्ड विजिट में व्यस्त हैं और सीयूजी नंबर पर आई कॉल नहीं उठा पाते हैं, तो फ्री होने के बाद वे उस नंबर पर कॉल बैक कर समस्या की जानकारी लेंगे लेकिन जिले के प्रशासनिक अमले में यह नियम पूरी तरह हवा-हवाई साबित हो रहा है। संवाद टीम के फोन बजने के तीन घंटे बाद तक किसी भी दफ्तर या अधिकारी की तरफ से पलटकर जवाब नहीं आया। ऐसे में अंदाजा लगाया जा सकता है कि जिले की आम जनता इन नंबरों के सहारे कितनी सुरक्षित और संतुष्ट है।
सभी को सीयूजी नंबर उठाने के आदेश हैं। यदि किसी वजह से फोन नहीं उठ पाता है तो फोन पलट कर करना जिम्मेदारी है। सभी अधिकारियों को सीयूजी फोन अपने पास ही रखने चाहिए। लापरवाही पर संबंधित अधिकारियों से स्पष्टीकरण तलब किया जाएगा। - शुभ्रांत कुमार शुक्ल, डीएम