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Etawah News: जमुनापारी बकरी खरीद में 22 लाख का खेल

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इटावा। राष्ट्रीय स्तर पर अपनी धाक रखने वाली इटावा की जमुनापारी बकरी की सरकारी खरीद में करीब 22 लाख रुपये के गोलमाल की आशंका है। भदावरी भैंस एवं जमुनापारी प्रजनन प्रक्षेत्र के लिए की गई बकरियों की खरीद में पशुपालकों से प्रति बकरी 20 हजार रुपये तक की अवैध वसूली का मामला सामने आया है। आरोप है कि विभाग की ओर से पशुपालकों के खातों में आरटीजीएस के जरिए तो 70 हजार रुपये का पूरा भुगतान भेजा गया, लेकिन बाद में पशुपालकों से 20-20 हजार रुपये की नकद वसूली की गई। जिन स्वाभिमानी पशुपालकों ने रुपये देने से साफ इंकार कर दिया, उनकी बकरियों पर बकायदा सरकारी टैग लगने के बावजूद उन्हें मेले से बैरंग लौटा दिया गया और खरीद निरस्त कर दी गई।
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चकरगनर रम्पुरा के अखिलेश कुमार ने बताया कि मेले में उनकी एक बकरी खरीदी गई थी। क्षेत्र के डॉक्टर अशोक ने बकरी खरीद पर 20 हजार रुपये मांगे थे। उन्होंने कहा कि उनकी बकरी अच्छे रुपये मिले रहे थे, इसलिए उन्होंने हां कर दी। खाते में रुपये आते ही दूसरे दिन उनसे 20 हजार रुपये ले लिए गए।
चकनगर के नगला मथुरी निवासी पशु पालक वीरेंद्र सिंह ने बताया कि इटावा मेले में अपनी बेहतरीन किस्म की जमुनापारी बकरी लेकर पहुंचे थे। उसकी बकरियों को कमेटी की टीम ने पसंद किया और कान में सरकारी टैग भी लगा दिया। उनका आरोप है कि उनके पास चकरनगर में तैनात पशु चिकित्सक डॉ. अशोक व बढ़पुरा में तैनात डॉ. संजीव शर्मा उनके पास आए और प्रति बकरी खरीद पर 20 हजार रुपये की मांग की। उन्होंने रुपये देने से इंकार कर दिया तो उनकी बकरी नहीं खरीदी गई, जबकि बाद में गांव से कमजोर व बीमार बकरियों की खरीद कर ली गई।
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चकरनगर के नगला चौप निवासी पशुपालक शिव सिंह ने बताया कि वह आठ मार्च को लगे पशु मेले में चार बकरियों को लेकर पहुंचे थे। उनकी बेहतर किस्म की जमुनापारी बकरी थी, जो पहले मेले में पहले स्थान पर आई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि उनसे क्षेत्र के पशु चिकित्सक ने प्रति बकरी 20 हजार रुपये देने पर बकरी खरीद की बात रखी। मना करने पर उनकी बकरी नहीं खरीदी गई। उन्होंने आरोप लगाया कि मेले में कमजोर बकरियों को कम दामों पर खरीद कर उन्हें सरकारी दामों पर लिया गया। यही वजह है कि बकरियां जल्द ही मर रही हैं।
जमुनापारी बकरियों की खरीद में चार सदस्यीय टीम शामिल रहीं। इसमें प्रमुख रूप से केंद्रीय बकरी अनुसंधान केंद्र मखदूम फरहा मथुरा के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. एमके सिंह, अपर निदेशक ग्रेट-2 पशु पालन विभाग कानपुर मंडल के डॉ. विजयवीर चंद्रयाल, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. धर्मेंद्र सिंह, व भदावरी भैंस एवं जमुनापारी प्रजनन प्रक्षेत्र के संयुक्त निदेशक डॉ. धर्मेंद्र कुमार मिश्रा रहे। इन्हीं की देखरेख में बकरियों की बकरियों की खरीद गई जबकि पशुपालकों को भुगतान पशुपालन विभाग की ओर से किया गया।
भदावरी भैंस एवं जमुनापारी प्रजनन प्रक्षेत्र में बकरियों के लगातार मरने की सूचना पर पंडित दीनदयाल उपाध्याय पशु चिकित्सा विज्ञान विशेष मथुरा, भारतीय पशु चिकित्सा संस्थान इज्जतनगर, बरेली, केंद्रीय बकरी अनुसंधान केंद्र मखदूम फरहा मथुरा की टीम ने जिले में आकर बीमार बैकरियों के सैंपल लिए। इसके अलावा अपर निदेशक ग्रेट-2 लघु पशु लखनऊ के डॉ. संजय श्रीवास्तव ने आकर पड़ताल की थी। इसमें बीमार बकरियों में माइक्रोप्लाजा (गंभीर निमोनिया) की वजह से उनके फेफड़ों में पानी भरना व सांस लेने में दिक्कत होने की समस्या पाई गई थी।
अपर निदेशक ग्रेड-2 (लघु पशु) लखनऊ डॉ. संजय श्रीवास्तव ने मौके पर आकर गहन पड़ताल की थी। इस दौरान वैज्ञानिकों की जांच रिपोर्ट में सामने आया था कि मृत बकरियों में माइक्रोप्लाज्मा (बेहद गंभीर निमोनिया) का संक्रमण था, जिसकी वजह से उनके फेफड़ों में पानी भर गया था और उन्हें सांस लेने में दिक्कत होने से उनकी लगातार मौत हो रही थी।
मुख्य रूप से इटावा (यमुना चंबल के बीहड़ी इलाके), आगरा और मथुरा क्षेत्र में जमुनापारी बकरी पाई जाती है। इसके लंबे लटकते कान और तोते जैसी उठी हुई नाक इस बकरी की मुख्य पहचान है। यह देश की सबसे बड़ी और भारी नस्लों में से एक है। यह नस्ल दूध और मांस दोनों के लिए दुनिया भर में सर्वश्रेष्ठ मानी जाती है। यह प्रतिदिन रिकॉर्ड मात्रा में दूध देने की क्षमता रखती है। देश ही नहीं बल्कि खाड़ी देशों में इसकी अत्यधिक मांग होने के कारण जमुनापारी बकरी की कीमत 80 हजार रुपये से लेकर एक लाख रुपये तक पहुंच गई है।
पशु मेले में उनकी टेंट व पशु पालकों को इकट्ठा करने की जिम्मेदारी थी। पशु पालकों से उनसे कोई रुपये नहीं लिए है। उनके की ओर से लगाए गए आरोप निराधार है।
-डॉ. संजीव शर्मा, पशु चिकित्साधिकारी बढ़पुरा।
पशु मेले में उनकी जिम्मेदारी पशु पालकों को इकट्ठा व व्यवस्थाएं देखने की जिम्मेदारी थी। बकरी खरीद में उनका कोई रोल नहीं था। इसकी जिम्मेदारी अफसरों की थी। रुपये लेने की बात गलत है।
-डॉ. अशोक पशु चिकित्साधिकारी चकरनगर।
र्जन-
भदावरी भैंस एवं जमुनापारी प्रजनन प्रक्षेत्र में बकरियों के लगातार मरने की जानकारी हुई है। इसकी जांच करवाई जा रही है। पशुपालकों को पूरा भुगतान आरटीजीएस के माध्यम से उनके बैंक खातों में किया गया है। विभाग की ओर से किसी भी प्रकार की नकद वसूली की कोई शिकायत अभी तक नहीं मिली है। यदि किसी पशुपालक के साथ ऐसा हुआ है या टैग लगने के बाद बकरी नहीं खरीदी गई, तो वह साक्ष्यों के साथ प्रमाण दे सकता है। मामले की निष्पक्ष जांच करवाकर दोषी अफसरों व कर्मियों पर विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
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-डॉ. विजयवीर चंद्रयाल, अपर निदेशक ग्रेट-2 पशु पालन विभाग कानपुर मंडल।
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