इटावा। जिला जेल में बुधवार को हुए संघर्ष में घायल एक बंदी की मौत हो गई है। घायल 24 में से डिप्टी जेलर व एक कैदी को सैफई पीजीआई और एक कैदी को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। जेलर ने नौ नामजद समेत 15-20 बंदी और कैदियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई है। घायल कैदियों की हालत गंभीर बताई गई है। मृतक मोनू पहाड़ी डी-टू गैंग और रईस बनारसी गैंग का शार्प शूटर रहा था वह अपनी प्रेमिका की हत्या करने समेत छह मामलों में विचाराधीन बंदी था।
घटनाक्रम के मुताबिक बुधवार को जेल की बैरक नंबर आठ में आजीवन कारावास की सजा काट रहे चंदौसी जिले के खालिद और अन्य बंदियों के बीच बुधवार की देर शाम करीब सात बजे विवाद हो गया। डिप्टी जेलर जगदीश प्रसाद बंदी रक्षकों, सिपाहियों और नंबरदारों के साथ पहुंचे। कैदियों व बंदियों ने डिप्टी जेलर, बंदी रक्षकों व सिपाहियों पर भी हमला बोल दिया। दोनों ओर से जमकर लाठी डंडे चले। इसमें दहेज हत्या की सजा काट रहे कैदी छुन्ना (28) पुत्र श्रीचंद निवासी औरैया, खालिद, बंदी राशिद उर्फ मोनू पहाड़ी (40) पुत्र नासिर अली निवासी दलेलपुरवा थाना अनवरगंज, कानपुर नगर के अलावा डिप्टी जेलर गंभीर रूप से घायल हो गए। रात में करीब आठ बजे छुन्ना को जेल प्रशासन ने जिला अस्पताल भेजा। इसके बाद जेल अधीक्षक राजकिशोर और एसएसपी आकाश तोमर ने अन्य कैदी, बंदियों व सुरक्षाकर्मियों को मामूली चोटें आने की बात कही।
अधिकारियों के बयान के करीब सवा तीन घंटे बाद करीब रात 12 बजे आनन फानन में खालिद, डिप्टी जेलर और मोनू को जिला अस्पताल पहुंचाया गया। डॉक्टर पीयूष त्रिपाठी ने डिप्टी जेलर व खालिद को पीजीआई सैफई रेफर कर दिया, जबकि मोनू को मृत घोषित कर दिया। वार्ड ब्वाय शिवम ने मेमो (लिखित सूचना) देकर सिविल लाइन थाने को सूचना दी। बंदी की मौत से प्रशासन में खलबली मच गई। बृहस्पतिवार की सुबह डीएम जेबी सिंह, एसएसपी आकाश तोमर जेल पहुंच गए।
डीआईजी जेल वेदप्रकाश त्रिपाठी भी सुबह करीब 8:30 बजे जेल पहुंच गए। करीब 5:30 घंटे बाद बाहर निकलकर उन्होंने बताया कि मामले की विस्तृत जांच कराई जा रही है। डीएम ने मामले की मजिस्ट्रेटियल जांच के आदेश दिए हैं। एडीएम ज्ञानप्रकाश 15 दिन में जांच कर रिपोर्ट डीएम को देंगे। जेल अधीक्षक राजकिशोर ने सिविल लाइन थाने में 30 बंदी व कैदियों के खिलाफ धारा बलवा, मारपीट, लोकसेवक पर हमला, गैर इरादतन हत्या (मारपीट कर गंभीर चोट पहुंचाना), सरकारी काम में बाधा डालना, सभी के सामान्य इरादे से एक आपराधिक कृत्य करने (आईपीसी की धारा 147,323, 353, 308, 332, 34) और 7 लॉ क्रिमिनल एमेेंडमेंट एक्ट के तहत रिपोर्ट दर्ज कराई है। इसमें कैदी खालिद, शिवामणि, बंदी ताजुद्दीन, अंकित फौजी, दिलीप, दुर्वेश, शंकर और मृतक बंदी मोनू पहाड़ी को नामजद कराया गया है। मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में डॉक्टरों के पैनल ने मोनू पहाड़ी के शव का पोस्टमार्टम किया। पोस्टमार्टम की वीडियोग्राफी भी कराई गई।
बाद में रईस बनारसी गैंग का दामन थामा
इटावा जेल में हुए गैंगवार में मारा गया मोनू पहाड़ी शातिर अपराधी था। वह कानपुर के डी-टू गैंग का शातिर अपराधी था। डी-टू गैंग का अस्तित्व खत्म होने पर मोनू ने रईस बनारसी गैंग का दामन थाम लिया। रईस के साथ मोनू ने कई घटनाओं को अंजाम दिया था। रईस बनारसी की वाराणसी में गैंगवार में हत्या हो चुकी है। मोनू पर हत्या, लूट, हत्या का प्रयास, अपहरण जैसे गंभीर धाराओं के 16 मामले कानपुर के विभिन्न थानों में दर्ज हैं। अनवरगंज थाने का वह हिस्ट्रीशीटर था।