इटावा। पंचकल्याणक गजरथ महामहोत्सव में रविवार को ज्ञान कल्याणक मनाया गया। सुबह महामुनिराज ऋषभदेव की आहार चर्या का मनोरम दृश्य दिखाया गया। आचार्य विराग सागर महाराज ने सभा में कहा महाराज ऋषभदेव दीक्षा लेते ही छ: माह का उपवास धारण कर ध्यानस्थ हो गए थे और 6 माह 13 दिन तक उनकी विधि नहीं मिली। हस्तिनापुर में ऋषभदेव का आहार हुआ।
पंचकल्याणक में सुबह प्रतिष्ठाचार्य अजित कुमार शास्त्री, पं. संदीप शास्त्री ने जिनाभिषेक, नित्यार्चना कराई। प्रवचन सभा आयोजित होने के साथ ही भगवान का आहार राजा श्रेयांस के द्वारा हुआ। वेदी व शिखर शुद्धि विधान सुबह 11 बजे शुरु हुआ। दोपहर में ज्ञान कल्याणक की अंतरंग क्रियाएं, श्रीजी की स्थापना, मंत्राराधना के साथ अन्य क्रियाएं हुई। शाम को संगीतमय महाआरती का आयोजन किया गया। रात में सांस्कृतिक कार्यक्रम सरायशेख मंदिर की महिलाओं एवं कन्याओं ने प्रस्तुत किए।
पंचकल्याणक महोत्सव का सोमवार को अंतिम दिन है। पंचकल्याणक का गजरथ यात्रा के साथ समापन होगा। जिसमें हाथियों पर सवार होकर इंद्रगण श्रीजी को लेकर भ्रमण करेंगे। मुनि विहसंत सागर के आहवान पर जैन समाज के लोगों ने संकल्प लिया जब तक गजरथ महोत्सव का समापन नहीं होगा वह अपने प्रतिष्ठानों को बंद रखेंगे और पंचकल्याणक के अंतिम दिन गजरथ महोत्सव के साक्षी बनेंगे।
सुबह 6:30 बजे : जिनाभिषेक, नित्यार्चना, जाप्यानुष्ठान।
सुबह 7 बजे : आदिकुमार भगवान को कैलाश पर्वत से निर्वाण की प्राप्ति, अग्निकुमार देवों द्वारा नखकेश संस्कार।
सुबह 9 बजे : आचार्य संघ के प्रवचन। अभिषेक मोक्ष कल्याणक पूजन, विश्वशांति महायज्ञ।
दोपहर 11 बजे : गजरथ यात्रा के साथ समापन होगा।
मुनि विहसंत सागर की प्रेरणा से बाह-जैतपुर मार्ग जैतपुरा में बन रहा अनुप्रेक्षा तीर्थ सपनों का तीर्थ होगा। जहां दुआ के साथ दवा और मानव सेवा हमेशा चालू रहेगी। विहसंत सागर भूमि पूजन कर चुके हैं। यहां मल्लिनाथ भगवान की सवा 19 फीट ऊंची प्रतिमा विराजमान होगी। इसके लिए दो वर्षीय बालक ने 108 बोरी सीमेंट दान किया, जबकि मैनपुरी से आए दोनों पैरों से दिव्यांग स्पर्श जैन ने भी 108 बोरी सीमेंट अपनी ओर से दान दी। इसके बाद दान करने वालों की भीड़ एकत्र होने लगी। वर्ष 2022 में पंचकल्याणक होने और भगवान मल्लिनाथ की प्रतिमा फरवरी तक इटावा पहुंचने की संभावना है।