इटावा। सपा मुखिया व पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के गृह क्षेत्र सैफई की महोला में बनी नई जेल को सेंट्रल जेल का दर्जा मिल गया है। 1942 बंदियों की क्षमता जेल प्रदेश की छठवीं सेंट्रल जेल होगी। यह जेल कई मायनों में खास है। इसमें मुख्य दीवार स्टैंडर्ड स्टील से बनाई गई है। सभी दीवारें व नालियां आरसीसी की हैं। प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ छह नवंबर को नवनिर्मित जेल का उद्घाटन करने इटावा आ रहे हैं। कारागार मुख्यालय लखनऊ के अधिकारियों की टीम ने यहां डेरा डाल दिया है।
सपा शासनकाल 2015 में तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने महोला गांव में जेल का निर्माण शुरू कराया था। कार्यदायी संस्था निर्माण निगम ने शुरुआत में जेल की बिल्डिंग की लागत 189.91करोड़ आंकी थी। फिर लागत बढ़कर 252.26 करोड़ हो गई थी। 2017 में जेल के निर्माण का काम बंद हो गया था। हालांकि तब तक 86 फीसदी काम पूरा हो गया था।
उसके बाद लागत बढ़कर 272.61 करोड़ हो गई थी। बाकी 14 फीसदी निर्माण कार्य पूरा कराने के लिए लगभग 20 करोड़ रुपये की जरूरत थी। जेल की बिल्डिंग का निर्माण 2020 में पूरा हो जाना था, लेकिन कोरोना काल के चलते नहीं हो सका। अब जेल बनकर तैयार है।
नवनिर्मित जेल में पहले जिला कारागार को शिफ्ट किया जाना था। बाद में इसे सेंट्रल जेल बनाने का प्रस्ताव रखा गया। अब इसे सेंट्रल जेल बनाए जाने की शासन से स्वीकृति मिल गई।
51 एकड़ में बनी नई सेंट्रल जेल में 1942 बंदियों को रखने की क्षमता है। इसमें 30-30 बंदियों के लिए 58 बैरक हैं। किशोर बंदियों के लिए दो और महिला बंदियों के तीन बैरक हैं। प्रत्येक बैरक की क्षमता 30-30 बंदी की होगी। दो हाई सिक्योरटी बैरक भी बनाई हैं, जिनमें शातिर व बड़े अपराधियों की कड़ी सुरक्षा में रखा जाएगा। प्रत्येक बैरक में 12-12 बंदी रखे जाएंगे।
नई सेंट्रल जेल की बिल्डिंग में आलीशान प्रशासनिक भवन भी बनाया गया है। इसमें जेल अधीक्षक, जेलर व अन्य अफसरों के अलावा जेल अधिकारी कार्यालय व कर्मचारियों के बैठने की भी व्यवस्था है। परिसर में टाइप फोर के चार, टाइप थ्री के तीन और टाइप टू के 120 आवास हैं।
निगहबानी के लिए परिसर में दो सेंट्रल वॉच टॉवर बनाए गए हैं। टॉवरों पर अत्याधुनिक शस्त्र व दूरबीन के साथ सुरक्षा कर्मी तैनात रहकर गतिविधियों पर नजर रखेंगे। इसके अलावा कई और वॉच टॉवरों की भी व्यवस्था की गई है। जेल में दो मजबूत गेट हैं। एक गेट पीछे और दूसरा आगे की तरफ है।
नई सेंट्रल जेल की बिल्डिंग में बंदी सेंध नहीं लगा सकेंगे। न ही जेल की दीवार फांद कर भाग सकेंगे। जेल की बिल्डिंग में मॉड्यूलर बिक्र (मशीन मोल्डेड ईंटें) लगाई गई हैं। इसके अलावा आरसीसी की दीवार व नालियां बनाई गईं। बंदी न तो दीवार में सेंध लगा सकेगा और न ही नालियों में। मुख्य दीवार में स्टैंडर्ड स्टील का प्रयोग किया गया है। बंदी दीवार फांद कर भागने की कोशिश करेगा तो स्टील की धार से उसका शरीर जख्मी हो जाएगा।
मुख्यमंत्री छह नवंबर को नई सेंट्रल जेल उद्घाटन करने इटावा आएंगे। इस बात की पुुष्टि एक प्रशासनिक अफसर की। आगमन के मद्देनजर पुलिस और प्रशासनिक अफसरों ने तैयारियां भी शुरू कर दी हैं। जेल के आसपास की सड़क का निर्माण कार्य में तेजी से चल रहा है। जिस रास्ते से मुख्यमंत्री को जाना है, उस मार्ग को चमकाया जा रहा है।
आगरा सेंट्रल जेल, वाराणसी सेंट्रल जेल, लखनऊ सेंट्रल जेल, नैनी सेंट्रल जेल, फतेहगढ़ सेंट्रल जेल हैं।
वरिष्ठ जेल अधीक्षक ने बताया कि महोला में बनी नई जेल सेंट्रल जेल होगी। इस जेल की बिल्डिंग कई मायकों ने प्रदेश की अन्य सेंट्रल जेंलों से अलग हैं। यहां सुरक्षा के मजबूत इंतजाम किए गए हैं।
मुख्यमंत्री के आगमन को लेकर जेल को चमकाते कर्मचारी- फोटो : ETAWAH