इटावा। दो दिन की छुट्टी के बाद मंगलवार सुबह जिला अस्पताल खुलते ही मरीजों की भीड़ लग गई। महिलाओं व पुरुषों की दो-दो लाइन लगने के बाद भी भीड़ खत्म नहीं हो रही थी। इसके चलते जिला अस्पताल प्रशासन को पूर्व सैनिकों की ड्यूटी लगानी पड़ गई। स्थिति यह रही कि सामान्य लोग दिव्यांग काउंटर की लाइन में खड़े नजर आए। पर्चे बनने के बाद डॉक्टर व जांच काउंटरों की लाइन में ओपीडी का पूरा समय चला गया। इससे 271 मरीजों को रिपोर्ट नहीं मिल पाई। मरीजों को जांच रिपोर्ट लेने के लिए बुधवार को बुलाया गया है। डॉक्टर रिपोर्ट देखकर उनका इलाज करेंगे तब तक के लिए उन्हें सामान्य दवाएं दे दी गईं।
मंगलवार को डॉ. बीरआर आंबेडकर संयुक्त जिला अस्पताल में सुबह होते ही मरीजों की भीड़ लग गई। सुबह आठ बजे से लेकर दोपहर 12 बजे तक 1380 मरीजों ने पंजीकरण करवाया। इसमें 446 मरीज सर्दी, जुकाम, बुखार व वायरल के पहुंचे। डॉक्टर ने परीक्षण के बाद 271 मरीजों की जांच करवाई। हालांकि मरीजों को अधिक भीड़ के चलते रिपोर्ट नहीं मिल सकी। वहीं, डॉक्टरों ने मरीजों को सामान्य दवा देकर घर भेज दिया। साथ ही बदलते समय में सावधानी बरतने की सलाह दी।
जिला अस्पताल के पंजीकरण काउंटर पर महिला व पुरुषों की दो-दो लाइनें लगवाई गई थी। भीड़ इतनी अधिक थी कि कुछ लोगों ने साइड से पर्चा बनवाने की कोशिश की। इससे धक्का-मुक्की के साथ ही लाइन में लगे लोगों की आपस में झड़प होने लगी। कई बार मारपीट की नौबत आ गई। हालांकि पूर्व सैनिकों ने समझाकर उन्हें शांत करवाया।
पंजीकरण काउंटर में लाइन में लगकर मरीज जब डॉक्टर कक्ष के सामने पहुंचे तो यहां भी मरीजों की भीड़ लगी थी। इससे मरीजों को यहां दिखाने के लिए काफी देर इंतजार करना पड़ा। डॉ. सौरभ यादव व डॉ. उज्जवल यादव ने एक-एक करके मरीजों को भी देखा। साथ ही बारिश के बाद ठंड बढ़ने पर लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी गई।
डॉक्टरों ने पूछताछ के बाद 271 की जांच करवाने को लिखा। पर्चे व डॉक्टरों को दिखाने के बाद मरीजों को जांच के लिए पंजीकरण करवाने के लिए भी लंबी लाइन में खड़े होना पड़ा। हैरत की बात ततोयह रही कि किसी का नंबर आया तो किसी को मायूस होकर लौटना पड़ा। जिनकी जांच हो भी तो रिपोर्ट हाथ नहीं लगी और उन्हें बुधवार को दोबारा बुलाया गया।
दो दिन की छुट्टी के बाद अचानक मरीजों की भीड़ बढ़ गई थी। मरीजों को लाइन में लगवाने के लिए जिला अस्पताल में तैनात पूर्व सैनिक की ड्यूटी लगा दी गई थी। इससे कोई अव्यवस्था न रहे। सभी मरीजों का एक-एक करके पर्चा बनाया गया।
-डॉ. पारितोष शुक्ला, सीएमएस पुरुष जिला अस्पताल।