इस भागादौड़ भरी ज़िन्दगी में हमें यह पता ही नहीं चलता की हम किस रोग के शिकार हो चुके हैं या यह भी हो सकता है की हमें अपने शरीर में पनप रहे रोग के बारे में बताने वाला ही न हो. कुछ ऐसा ही रोग है “स्लीप अप्निया”जिसके बारे में बहुत ही कम लोगों को जानकारी है अगर है भी तो ऐसे रोगों के दूरगामी परिणामों से वे बहुत दूर हैं. इसलिए इस रोग के बारे में थोडा समझा जाए.
“स्लीप अप्निया” का सीधा सम्बन्ध आपकी श्वास प्रणाली से है जिसमें व्यक्ति को सोते समय सांस लेने में बहुत परेशानी महसूस होती है कारणवश वह अनिंद्रा व अपने कार्य करने की क्षमता से बहुत ही कम कार्य कर पाता है इसका मुख्य कारण रात में नींद पूरी न होना है जिस कारण से व्यक्ति को दिन में कार्य करने में थकावट और नींद की झपकियाँ आती है जिस कारण से उसकी कार्यक्षमता प्रभावित होती है और वह कोई कार्य एकाग्रचित होकर नहीं कर पाता. इसी के साथ-साथ दुसरे और हानिकारक रोग व्यक्ति के शरीर में अपने स्थान बना लेते हैं जिसमें प्रमुख हैं मधुमेह, उक्त-रक्तचाप आदि.
यह मूलतः दो प्रकार के होते हैं जिसमें केन्द्रित स्लीप अप्निया में दिमाग़ श्वास मसल्स को संकेत भेजने में रूकावट महसूस करता है जो की बहुत की कम लोगो में पाया जाता है और दूसरा होता है बाधित स्लीप अप्निया जिसमें व्यक्ति को श्वास लेने में बहुत ही दिक्कत होती है जो की खुर्राटे का रूप लेती है और सबसे ज्यादा पाए जाने वाला रोगों की श्रेणियां में है इसलिए इसके मरीजों की सख्या भी बहुत है. यह बीमारी मुख्य रूप से पुरूषों में ज्यादा पाई जाती है लेकिन य कहेना भी उचित नहीं होगा की महिलाएं भी इस रोग से ग्रसित हो जाती है इसलिए कोई श्वास संबधी परेशानी आए तुरंत ही अपने विशेषज्ञ से ज़रूर परामर्श लें.
लेकिन इसके बाबजूद भी होम्योपैथी चिकित्सा प्रणाली में वह क्षमता है की वह इन सभी समस्याओं का निदान बहुत ही कम समय में करने में सक्ष्म है वह भी बिना दुष्प्रभाव के. बस आपको ज़रुरत हैं एक ऐसे होम्योपैथीक विशेषज्ञ की जिसको इस बीमारी के बारे में गहन अध्यान किया हो और जो आपको इस बीमारी से ज़ल्दी मुक्ति दिला सके.
लक्षण
1. सांस लेने में परेशानी
2. रात में जागते रहना
3. नीद आने में परेशानी होना
4. खर्राटे भरना
5. दिमागी थकान
6. काम करने में एकाग्रता की कमी
7. अत्यधिक चिढ़चिढ़ापन
कुछ होम्योपैथीक दवाइयां जो इस बीमारी में कारगर है
1. अर्सेनिकम: यह सांस संबंधी विकारों में सहायक रहती है.
2. सल्फर: यह सांस लेने में आये रुकबत को दूर करती हैं व उससे उत्पन्न घुटन को दूर करती है.
3. स्पोंगिया : यह सीने की जकरण को दूर करती है.
4. ओपियम: यह सांस द्वारा उत्पन्न उलझन को दूर करने में सहायक होती है.
बस थोडा सा खान पान में ध्यान और सही समय पर होम्योपैथिक दवायों का समय पर सेवन इस रोग से आपको हमेशा के लिए मुक्ति दिला सकता है.
सीनियर डॉक्टर पंकज अग्रवाल से बातचीत पर आधारित