सैफई। उप्र आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय के फिजियोथेरेपी विभाग की चार दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला फिजियोकॉन- 2016 में स्टूडेंट्स तथा प्रोफेशनल्स को फि जियोथेरेपी की सैद्धान्तिक एवं व्यवहारिक बारीकियों के बारे में विस्तार से बताया गया।
राष्ट्रीय अस्थि विकलांग संस्थान (एनआईओएच) कोलकाता के पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. एसएस राव ने स्पाइन मोबिलाइजेसन से संबंधित विषय पर जानकारी दी। बताया कि स्पाइन तथा अन्य जोड़ से संबंधित तकलीफों जैसे कमर दर्द, स्पाइनल दर्द, पैरास्पाइनल दर्द, रेडिएटिंग दर्द का निदान कुछ जरूरी व्यायामों को सही तरीके से कराकर ठीक किया जा सकता है।
आरडी गार्डी मेडिकल कॉलेज उज्जैन, मध्य प्रदेश के कॉलेज ऑफ फिजियोथेरेपी के प्राचार्य एवं प्रोफेसर डा. संजीव झा ने मैनुअल टेक्निक्स इन स्पोर्ट इंजरी पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि खिलाड़ियों को होने वाली परेशानियों जिसमें मोच, मसल सोरनैस, मांसपेशियों का खिंचाव, एड़ी दर्द, कमर दर्द एवं खिलाड़ियों के लिए विभिन्न रिलेक्सेशन तकनीक, टेपिंग टेक्निक, पीएनएफ टेक्निक स्ट्रेचिंग तकनीक को विस्तार से सिखाया।
एम्स नई दिल्ली के मुख्य फि जियोथेरेपिस्ट डॉ. वीपी गुप्ता तथा डॉ. सचिन ने आईसीयू में प्रयोग होने वाले जरूरी जीवन रक्षक उपकरणों के प्रयोग के बारे में व्यवहारिक प्रशिक्षण दिया।
उन्होंने अपने विषय आईसीयू प्रोसिजर फॉर हेल्थ प्रोफेशनल्स पर जानकारी दी। डॉ. आरएमएल हॉस्पिटल लखनऊ के धर्मवीर कुमार ने बायो इंजीनियरिंग पर प्रकाश डाला।
उन्होंने शारीरिक कार्यक्षमता बढ़ाने एवं शरीर की गतिशीलता को बनाए रखने वाले फि जियोथेरेपी उपकरणों जिसमें केएफओ, एचकेएफओ, फिंगर स्पिलिंट, सर्वाइकल कॉलर, स्पाइनल जैकेट, नी प्रोस्थेसिस, नी आर्थेसिस को बनाने की विधि एवं सही तरीके से उपयोग करने की तकनीक प्रशिक्षुओं को सिखाई। फिजियोथेरेपी विषय से संबंधित सैद्धांतिक प्रशिक्षण देने वालों में ऑर्गनाइजिंग चेयरमैन तेजवीर सिंह, साइंटिफिक सेशन के संयोजक डॉ. पी गौरीशंकर, फिजियोकान- 2016 के संयोजक सदस्य अंजली अग्रवाल, नेहा रस्तोगी, केबी रंजीत सिंह चौधरी, डीके मिश्रा, अनिल यादव, अमित सिंह, अजय कुशवाहा आदि रहे।
कार्यशाला में मध्य प्रदेश के कॉलेज ऑफ फिजियोथेरेपी के प्राचार्य एवं प्रोफेसर डॉ. संजीव झा ने प्रशिक्षण ले रहे स्टूडेंट्स तथा प्रोफेशनल्स को फि जियोथेरेपी की व्यवहारिक बारीकियां बताई।