इटावा। होली का त्योहार नजदीक है। 17 मार्च की शाम को होलिका दहन व अगले दिन होली खेली जाएगी। होली एक दिन का पर्व न होकर पूरे नौ दिनों का त्योहार है। होलाष्टक के समय शुभ कार्य वर्जित होते हैं। यह फाल्गुन शुक्ल पक्ष की अष्टमी को लगता है। होलाष्टक फिर आठ दिन तक रहेगा और सभी शुभ मांगलिक कार्य रोक दिए जाएंगे। यह दुलहंडी पर रंग खेलकर खत्म होता है।
ज्योतिषाचार्य राजीव अग्रवाल ने बताया होलाष्टक के शाब्दिक अर्थ पर जाएंगे तो होला, अष्टक अर्थात होली से पूर्व के आठ दिन जो दिन होता है, वह होलाष्टक कहलाता है।
होलाष्टक 10 मार्च को लगेगा और 18 मार्च की दोपहर तक रहेगा। इस आठ दिन के समय में कोई भी मांगलिक कार्य, गृह प्रवेश करना वर्जित होगा। नए रोजगार और नया व्यवसाय भी नहीं शुरू करना चाहिए।
उन्होंने बताया कि फाल्गुन शुक्ल अष्टमी पर दो डंडे स्थापित किए जाते हैं। एक को होलिका तथा दूसरे को प्रह्लाद माना जाता है। इससे पूर्व इस स्थान को गंगा जल से शुद्ध किया जाता है, फिर हर दिन इसमें गोबर के उपल, लकड़ी, घास और जलने में सहायक चीजें डालकर इसे बड़ा किया जाता है।
भक्त इन आठ दिनों को अशुभ मानते हैं। उनका मानना है कि इन दिनों में शुभ कार्य करने से उनमें विघ्न बाधाएं आने की संभावनाएं अधिक रहती हैं।
ज्योतिषाचार्य के अनुसार होलाष्टक मे सभी शुभ कार्य करना वर्जित रहता है। इन आठ दिवस आठ ग्रह उग्र रहते हैं। इन दिवसों में अष्टमी को चंद्रमा, नवमी को सूर्य, दशमी को शनि, एकादशी को शुक्र, द्वादशी को गुरु, त्रयोदशी को बुध, चतुर्दशी को मंगल और पूर्णिमा को राहु उग्र रहते हैं।
इसलिए इस अवधि में शुभ कार्य करने वर्जित है।
होलाष्टक में न करें ये कार्य
विवाह होली से पूर्व के आठ दिनों में भूलकर भी न करें। यह समय शुभ नहीं माना जाता है, जब तक की कोई विशेष योग आदि न हो।
होलाष्टक के समय में अपने बच्चे का नामकरण या मुंडन संस्कार कराने से बचें। भवन निर्माण होलाष्टक के समय में किसी भी भवन का निर्माण कार्य शुरू न कराएं। यज्ञ या हवन अनुष्ठान भी होली बाद कराएं।
होलाष्टक के समय में नई नौकरी ज्वॉइन करने से बचें। भवन व वाहन आदि की खरीदारी से बचें। शगुन के तौर पर भी रुपये आदि न दें। सनातन हिंदू धर्म में 16 प्रकार के संस्कार बताए जाते हैं, इनमें से किसी भी संस्कार को संपन्न नहीं करना चाहिए।
इन दिनों किसी की मौत होती है तो उसके अंत्येष्टि संस्कार के लिए भी शांति पूजन करवाया जाता है।
प्रदोष बेला में होलिका दहन करना श्रेष्ठ रहेगा
आचार्य पंडित विनोद कुमार दुबे ने बताया इस बार होलिका दहन 17 मार्च को शाम प्रदोष बेला में 6:43 से 9:08 मिनट तक होलिका दहन करना श्रेष्ठ रहेगा। इस शुभ घड़ी में होलिका का दहन अति शुभ है।