फोटो 36:: तेज धूप के कारण सरसों की फसल में लगा रोग। संवाद
इटावा। जिले में मौसम के मिजाज ने तेजी से करवट ली है। अभी फरवरी का महीना खत्म भी नहीं हुआ है कि सूरज की तपिश ने लोगों के पसीने छुड़ाने शुरू कर दिए हैं। सोमवार को जनपद का अधिकतम तापमान 28.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जिसने फरवरी के सामान्य औसत को पीछे छोड़ दिया है। दिन की चिलचिलाती धूप के साथ-साथ अब रात के तापमान में भी बढ़ोत्तरी होने लगी है, जिससे पंखे और कूलर चलाने की नौबत आने लगी है। अनुमान लगाया जा रहा है कि इसी सप्ताह पारा 31 डिग्री सेल्सियस के स्तर को पार कर जाएगा।
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार पश्चिमी विक्षोभ के कमजोर पड़ने और पछुआ हवाओं के प्रभाव से गर्मी ने समय से पहले दस्तक दे दी है। सोमवार को सुबह से ही धूप में तीखापन महसूस किया गया। दोपहर होते-होते सड़कों पर आवाजाही कम नजर आई और लोग छाया की तलाश करते दिखे। वरिष्ठ मौसम वैज्ञानिक डॉ. एसएन सुनील पांडे ने बताया कि गर्मी का यह दौर अभी और आक्रामक होगा। आने वाले तीन से चार दिनों के भीतर आसमान साफ रहेगा और धूप का असर बढ़ेगा। अनुमान लगाया जा रहा है कि इसी सप्ताह पारा 31 डिग्री सेल्सियस के स्तर को पार कर जाएगा। अगर तापमान इसी रफ़्तार से बढ़ा, तो मार्च की शुरुआत में ही भीषण गर्मी का सामना करना पड़ सकता है।
कृषि विशेषज्ञ डॉ. देवेंद्र कुमार के अनुसार फरवरी के अंत में पारा 30 डिग्री के करीब पहुंचना फसलों के लिए हानिकारक है। अचानक बढ़ी गर्मी से गेहूं की फसल में टर्मिनल हीट का खतरा बढ़ गया है। समय से पहले दाना सूखने से पैदावार प्रभावित हो सकती है। वहीं सरसों की फसल में इस तापमान पर माहू (लाही) कीट का प्रकोप बढ़ सकता है, जो फलियों का रस चूसकर उन्हें खोखला कर देता है।
बदलते मौसम ने सेहत पर भी सीधा हमला किया है। दिन में गर्मी और रात में हल्की ठंड के दोहरे मौसम के कारण लोग वायरल बुखार और गले के संक्रमण की चपेट में आ रहे हैं। जिला अस्पताल में सामान्य दिनों की तुलना में ओपीडी में मरीजों की संख्या 10 प्रतिशत तक बढ़ गई है। डॉक्टरों के अनुसार, लोग अचानक फ्रिज का ठंडा पानी पीना शुरू कर रहे हैं जो सीधे तौर पर फेफड़ों और गले को प्रभावित कर रहा है।