सैफई (इटावा)। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दौरे से आठ घंटे पहले ही पुलिस ने ग्रामीणों को घरों में कैद कर दिया। सुबह से गांव में किसी को आने-जाने की अनुमति नहीं थी। मुख्यमंत्री के गांव पहुंचने पर खिड़की दरवाजे तक बंद करवा दिए गए, लोग झांककर भी नहीं देख पाए। आठ मिनट में गांव का दौरा कर मुख्यमंत्री चले गए।
मुख्यमंत्री के दौरे को देखते हुए गीज समेत पांच गांवों में शुक्रवार को साफ सफाई कराई गई थी। अन्य खामियां भी अधिकारियों ने दूर करा दी थीं। शनिवार को सुबह से ही गांव में आने जाने पर पुलिस ने रोक लगा दी गई। अगर कोई आया तो उसे सख्त हिदायत देकर घर भेज दिया गया। सैफई चिकित्सा विश्वविद्यालय से मुख्यमंत्री गींजा गांव पहुंचे। वह सीधे कोरोना पीड़ित रहे राजेश राठौर के घर पर पहुंचे। घर के बाहर राजेश व उसकी बेटी लक्ष्मी से परिवार का हाल जाना।
मुख्यमंत्री के गांव में रहने के दौरान गांव के लोग घरों में कैद रहे। सख्ती इस कदर थी कि कोई ग्रामीण घर की खिड़की से भी नहीं झांक सका। मुख्यमंत्री को जिस रास्ते से गुजरे वहां पुलिसकर्मियों को लाइन से खड़ा कर दिया गया। राजेश के घर से मुख्यमंत्री प्राथमिक विद्यालय में पहुंचे। वहां ग्राम प्रधान, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं आदि से सैनिटाइजेशन आदि की जानकारी ली। इसके बाद हेलीपैड की ओर रवाना हो गए। मुख्यमंत्री केवल आठ मिनट गांव में रहे।
मरहम न लगाते पर कुछ दर्द तो सुन जाते
गीजा के लोगों को मुख्यमंत्री से मुलाकात न करने का मलाल
संवाद न्यूज एजेंसी
सैफई। गीजा गांव आए मुख्यमंत्री तक लोगों को नहीं जाने दिया गया। इससे गांव के लोगों में मायूसी रही। मुख्यमंत्री के जाने के बाद ग्रामीणों ने कहा कि मुख्यमंत्री गांव तक आए और हम लोगों को अपनी बात तक कहने का मौका नहीं मिला। वह कुछ भले ही न देकर जाते लेकिन हमारी फरियाद तो सुन लेते। गांव में कुछ ऐसा कर जाते जो एक यादगार बन जाता। ऐसे आकर चले जाना समझ में नहीं आया।
ग्रामीण बोले
गांव के उदयवीर शाक्य का कहना है कि गांव के लोगों को दौरे से काफी उम्मीदें थीं। परंतु किसी को उनसे मिलने ही नहीं दिया गया। साहब आए और चले गए, किसी को कुछ पता ही नहीं चला।
लालजी दुबे ने कहा कि पुलिस ने तो किसी को पास तक फटकने नहीं दिया। सभी को घरों में बंद कर दिया गया। कोरोना पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता और सरकारी नौकरी ही दे जाते।
सुबोध कुमार ने कहा कि मुख्यमंत्री के इस दौरे की उपयोगिता ही नहीं समझ में आई। इतने कम समय में जनता की कोई समस्या भी तो नहीं सुनी जा सकती। अच्छा होता कि ग्रामीणों से समस्याएं पूछते।
अंकित श्रीवास्तव ने कहा कि मुख्यमंत्री के दौरे का इतना फायदा जरूर मिला कि गांव की साफ सफाई हो गई। महीनों से साफ सफाई नहीं हुई थी। दो दिन जिले भर के सफाई कर्मचारी लगे रहे।
निगेटिव रिपोर्ट आई तब बनाया कंटोनमेंट जोन
सैफई। मुख्यमंत्री के दौरे से कोरोना संक्रमित रहे राजेश राठौर के घर के आसपास कंटोनमेंट जोन बना दिया गया। जब तक राजेश व उनकी पत्नी ममता संक्रमित रहीं तब तक कंटोनमेंट जोन नहीं बनाया। रिपोर्ट निगेटिव आने के बाद बैरीकेडिंग लगाकर कंटोनमेंट जोन बना दिया गया। गांव की आंगनबाड़ी कार्यकर्ता ममता (40) की तीन मई को तबियत बिगड़ी थी। चार मई को कोरोना की जांच हुई और छह को रिपोर्ट पॉजिटिव आई। उन्हें सैफई चिकित्सा विवि में भर्ती करा दिया गया। 10 मई को परिवार के 20 लोगों की जांच हुई, इसमें राजेश पॉजिटिव निकले। 15 मई को ममता की मौत हो गई। 19 मई को राजेश की रिपोर्ट निगेटिव आ गई थी। (संवाद)