इटावा। चंबल में डॉल्फिन की अठखेलियां शुरू हो गई हैं। पर्यावरण प्रेमी यह रोमांचक दृश्य देखने के लिए चंबल नदी पहुंच रहे हैं। डाल्फिन का यूं चंबल में अठखेलियां करना पर्यटकों को काफी आकर्षित कर रहा है। डाल्फिन का कुनबा भी बढ़ता जा रहा है। डॉल्फिन धूप निकलते ही नदी में अठखेलियां करने लगती है।
वर्ष 1979 में राष्ट्रीय चंबल अभ्यारण में घड़ियालों के साथ डॉल्फिन के भी संरक्षण का काम शुरू किया गया था। उस समय यहां डाल्फिन के महज 5 जोड़े छोड़े गए थे। अब इनकी संख्या बढ़कर 197 हो गई है। डाल्फिन इंसानों को देखकर और अधिक रोमांचित होती है। इसलिए उसका अठखेलियां करना लोगों को खूब भाता है।
दिसंबर 2020 में चंबल सेंच्युरी की टीम ने डाल्फिनों की गणना की तो नतीजे काफी बेहतर मिले। चंबल में 150 वयस्क डॉल्फिन अठखेलियां करती दिखाई दी थीं।
वन क्षेत्राधिकारी हर किशोर शुक्ला ने बताया कि समुद्री लहरों के बीच अठखेलियां करने वाली डाल्फिनों को चंबल का साफ पानी रास आया है।
मुफीद बहाव व पानी में घुलनशील ऑक्सीजन की प्रचुर मात्रा अच्छी मिलने से उनकी संख्या में निरंतर इजाफा हो रहा है। क्षेत्राधिकारी के अनुसार यहीं स्थिति रहीं, तो वह दिन दूर नहीं जब गंगा से ज्यादा डॉल्फिन चंबल में पाई जाएगी।
राष्ट्रीय जलीव जीव है डाल्फिन
केंद्र सरकार ने 5 अक्टूबर 2009 में डॉल्फिन को भारत का राष्ट्रीय जलीय जीव घोषित किया था। गंगा में पाई जाने वाली गंगा डॉल्फिन एक नेत्रहीन जलीय जीव है। जिसकी सूंघने की शक्ति बड़ी तीव्र होती है।
भारत में इनकी संख्या लगभग 2000 है। 1972 में डॉल्फिन को भारतीय वन्य जीव संरक्षण कानून के दायरे में लाया गया। इसके बाद 1996 में इंटरनेशनल यूनियन आफ कंजर्वेशन ऑफ नेचर ने इन्हें विलुप्त प्राय जलीय जीव घोषित किया।
डॉल्फिन को मछली न समझें
डॉल्फिन स्तन धारी प्राणी है। व्हेल व डॉल्फिन एक ही कैटेगरी में आती है। डॉल्फिन को अकेले रहना पसंद नहीं है। वह 10 से 12 के समूह में रहती है। वे आवाज व सीटियों के माध्यम से एक दूसरे से बात करती हैं।
डॉल्फिन को सांस लेने के लिए हर 15 मिनट में सतह पर आना होता है। मादा डाल्फिन नर से बड़ी होती है। इनकी औसत आयु 28 साल है। केंद्र सरकार ने इन्हें नांन ह्यूमन प्रदर्शन या गैर मानवीय जीव की श्रेणी में रखा है यानी एक ऐसा जीव जो इंसान न होते हुए भी इंसानों की तरह जाना जाता है और वैसे ही जीने का हक रखते है।
चंबल में बढ़ रहे घड़ियाल और मगरमच्छ
सेंच्युरी क्षेत्र के डीएफओ दीपक श्रीवास्तव ने बताया कि चंबल में इस समय घड़ियाल और मगरमच्छों की संख्या बढ़ रही है। पिछली गणना के अनुसार 598 मगरमच्छ और 1910 घड़ियाल हैं।
अब इनकी गणना फिर की जा रही है। मगरमच्छ चंबल यमुना के खारों और नालों में 200 से 300 मीटर तक अंदर चला जाता है। इसलिए गणना में कठिनाई आती है। इस साल चंबल में 4062 घड़ियालों के बच्चे छोड़े गए हैं।
चंबल नदी के किनारे घूमता मगरमच्छ- फोटो : ETAWAH