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डीएपी के संकट से किसानों में रोष

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बकेवर। बकेवर समिति पर डीएपी न पहुंचने से किसानों को फसल बुवाई के लिए समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। शनिवार को यूरिया के दो ट्रैक्टर भिजवाए गए। डीएपी अभी भी नहीं भेजी गई है। डीएपी न मिलने से गेहूं की बुवाई लेट हो रही है। किसानों में इससे आक्रोश है।
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प्राइवेट दुकानों पर ब्लैक के दामों में डीएपी तमाम दुकानदार बेच रहे हैं। सहकारी समिति पर डीएपी की किल्लत दो सप्ताह से है। 15 टन डीएपी पिछले सप्ताह भेजी गई थी। वह मात्र कुछ घंटे में ही वितरित हो गई।
यूरिया की जरूरत किसानों को अब पड़ने लगी है। यूरिया भी पिछले सप्ताह समाप्त हो गई थी। शनिवार को 30 टन यूरिया सहकारी समिति केंद्र पर भेज दी गई है। सोमवार से वितरित हो सकेगी। बकेवर लखना के दुकानदार डीएपी 13 सौ से लेकर 16 सौ रुपये तक ब्लैक में बेच रहे हैं।
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दो दिन पूर्व व्यासपुर का एक किसान बकेवर से एक प्राइवेट दुकान से 16 सौ रुपये में डीएपी की एक बोरी के हिसाब से दो बोरी ले गया। कुड़रिया गांव निवासी किसान वेद प्रकाश प्रजापति ने बताया कि पांच छह दिन से डीएपी लेने के लिए बकेवर समिति पर आ रहे हैं, लेकिन खाद न मिलने से बुवाई लेट हो रही है।
सुधीर तिवारी ने बताया कि एक बोरी डीएपी लेने के लिए तीन दिन से आ रहे, लेकिन नहीं मिली। इस बाबत सहकारी समिति के सचिव राजीव गोयल ने बताया कि डीएपी के लिए डिमांड भेज दी गई है। अभी डीएपी की रैक नहीं लगी है।
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