फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

ईद पर किया लॉकडाउन का पालन, नहीं किया दिखावा

विज्ञापन
विज्ञापन
ईद-उल-फितर खुशियों भरा और आपसी मेल मिलाप का त्योहार है। रमजान में रोजा रखकर मुस्लिम समाज के लोग ईद- उल- फितर को लेकर मन पसंद कपड़े खरीदने की तैयारियों में जुट जाते थे।
विज्ञापन

लेकिन इस बार कोरोना महामारी के वजह से लोगों ने घरों में ही नमाज पढ़ी। कुछ लोगों का कहना था कि इस बार रस्म अदायगी भर ईद मनाई गई। दूसरों की सलामती के लिए किसी से ज्यादा मेल जोल नहीं किया।
हाथ मिलाने और गले मिलने से बचते हुए नमस्ते कर दूर से बधाई दी। या फिर सोशल मीडिया के जरिए अपनी खुशियां व्यक्त कीं
मददगार फाउंडेशन चलाने वाले पचराहा निवासी फरहान शकील ने कहा कि जान है तो जहान है। इसे धयान रख कर तथा शासन और प्रशासन के निर्देशों का पालन करते हुए ईद मनाई।
विज्ञापन

कोरोना महामारी की वजह से न अपनों को घर बुला सके और न उनसे गले ही मिल सके। सोशल मीडिया के जरिए अपने प्रियजनों के संग ईद की खुशियां मनाई।
यूनानी चिकित्सक डॉ. अयाज अली का कहना था। कोरोना महामारी ने इस बार की ईद पर ऐसा ग्रहण लगाया कि चाह कर भी कुछ नहीं कर सके।
इस बार ईद रस्म अदायगी के तौर पर मनाई गई। रमजान में जकात के रूप में साल भर की कमाई का ढाई फीसदी निकाल कर उससे जरूरतमंदों के चेहरे पर मुस्कान लाने का प्रयास किया।
वरिष्ठ अधिवक्ता मोहसिन अली का कहना है कि कभी सोचा न था कि ऐसे माहौल में अपनों से दूरी बनाते हुए ईद मनानी पड़ेगी।
पहली बार हुआ जब अपनों को चाहते हुए उन्हें गले लगाने के बजाय दूर से हाथ जोड़ने पड़े। ईद खुशियां बांटने का त्योहार है लेकिन खुद से ज्यादा अपनों की सलामती के लिए उनसे दूर-दूर ही रहना पड़ा।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें