कोरोना मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए जिला प्रशासन ने नगर और ग्रामीण क्षेत्रों की 504 निगरानी समितियों को फिर सक्रिय कर दिया है।
कटेंनमेंट जोन के निर्धारण समेत पूरी तैयारी कर ली गई है। एक केस मिलने पर मरीज के घर को केंद्र मानकर 25 मीटर और एक से अधिक केस मिलने पर 50 मीटर की परिधि को कटेंनमेंट जोन घोषित किया जाएगा।
बहुमंजिला इमारत में एक केस मिलने पर इमारत के उस तल को कटेंनमेंट जोन घोषित किया जाएगा, जिस तल पर मरीज रहता होगा। एक से अधिक केस मिलने पर पूरी इमारत को कटेंनमेंट जोन घोषित कर दिया जाएगा।
सीएमओ डॉ. एनएस तोमर ने बताया कि कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामलों के मद्देनजर शासन की नई गाइड लाइन जारी हो गई है। जिला सर्विलांस अधिकारी प्रतिदिन कोरोना संक्रमित मरीजों की जानकारी जिला प्रतिरक्षण अधिकारी को देंगे।
जिला प्रतिरक्षण अधिकारी कटेंनमेंट जोन में सर्विलांस की गतिविधियों के नोडल अधिकारी होंगे। प्रत्येक पांच टीमों पर एक सुपरवाइजर बनाया जाएगा, जो अपने अंडर में काम करने वाली टीमों की सूचनाओं को संकलित करके जिला सर्विलांस अधिकारी को मुहैया कराएगा। वह जिले भर की सूचनाओं को जुटाकर राज्य मुख्यालय भेजेंगे।
प्रत्येक टीम के सदस्य अपने क्षेत्र में घर-घर जाकर खांसी, जुकाम, बुखार, सांस लेने में दिक्कत आदि लक्षण वाले मरीजों को चिह्नित करके रोगी का नाम, पता, मोबाइल नंबर आदि ब्योरा लेंगे। अंतिम पॉजिटिव केस का सैंपल लेने की तिथि के 14 दिन तक संबंधित क्षेत्र को कंटेनमेंट जोन रहेगा।
उसके बाद केस न मिलने पर क्षेत्र के कंटेनमेंट जोन की सूची से बाहर कर दिया जाएगा। पूर्व में यदि एक केस पाए जाने पर कोई भी कंटेनमेंट जोन बनाया गया है और उसी क्षेत्र में यदि फिर एक या उसके अधिक केस मिलते हैं, तो उसे कलस्टर माना जाएगा।
प्रत्येक टीम में स्वास्थ्य विभाग, शहरी क्षेत्र में स्थानीय निकाय, ग्रामीण क्षेत्र में ग्राम विकास या पंचायती और स्थानीय प्रशासन से एक-एक सदस्य मिलाकर तीन सदस्य होंगे।
डीसी इनसेट छोड़ दें