आलू की बुआई का दौर शुरू हो गया है। उद्यान विभाग में आलू का बीज उपलब्ध है मगर उसको खरीदने वाले किसान नदारद हैं। इसका कारण बीज का मंहगा होना बताया जा रहा है। विभागीय अफसर किसानों को बीज खरीदने के लिए प्रेरित कर रहे हैं बावजूद इसके किसान बीज खरीदने नहीं आ रहे हैं।
शासन ने उद्यान विभाग को आलू के बीज बेचने के लिए भेजे हैं। इस साल जनपद को शासन से मांग के अनुरूप 1500 क्विंटल आलू का बीज आवंटित किया गया था। इसमें कुफरी बहार, कुफरी सूर्या, चिप सोना, फ्राई सोना व ख्याति प्रजातियों के बीज दिए गए हैं। जनपद में अब तक 815 क्विंटल बीज प्राप्त हो चुका है।
कुछ किसानों ने आलू के बीज की खरीददारी भी की है। हालांकि अभी भी उद्यान विभाग के स्टाक में काफी मात्रा में बीज पड़ा है, जबकि इसकी दूसरी खेप आने वाली है। अफसरों की चिंता इस बात को लेकर है कि जब पहले स्टाक की ही खपत पूरी नहीं हो सकी है तब दूसरे स्टाक का माल कैसे खप पाएगा।
सरकारी आलू बीज किसानों को 2200 रुपये प्रति क्विंटल की दर से दिया जा रहा है, जबकि बाजार में आलू सस्ता है। इसका कारण पिछले वर्ष आलू की बंपर पैदावार को बताया जा रहा है। इस समय बाजार में बीज वाला आलू करीब 700 रुपये प्रति कुंतल की दर से बिक रहा है।
इस बाबत जिला उद्यान अधिकारी धर्मपाल सिंह यादव ने बताया कि शासन से आवंटित आलू के बीज की एक आ चुकी है दूसरी शीघ्र आने वाली है, लेकिन किसानों का रुझान बीज की खरीद के प्रति नहीं दिख रहा है। क्योंकि बाजार में बीज वाला आलू सस्ता है, जबकि सरकारी बीज महंगा है।