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बारिश न होने से किसानों की चिंताएं बढ़ीं

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इटावा/ताखा। बारिश न होने की वजह से लोग गर्मी से तो बेहाल हैं ही, खेती-किसानी भी पिछड़ रही है। गंगा दशहरा तक मक्का की बुआई हो जाती चाहिए लेकिन अभी तक मानसून ही सक्रिय नहीं हुआ है। गर्मी के कारण नर्सरी में धान का जाम भी कम हुआ है। अगर जल्द बरसात शुरू न हुई तो मक्का, बाजरा के साथ धान की फसल भी पिछड़ जाएगी। किसान उम्मीद भरी नजरों से आसमान की ओर देख रहे हैं।
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मंगलवार की रात करीब पौने दस बजे बूंदाबांदी शुरू होने पर लगा कि इंद्रदेव मेहरबान हो गए हैं। करीब तीन- चार मिनट बाद बूंदाबांदी बंद हो गई। बुधवार सुबह से लेकर दोपहर बदल छाए रहे लेकिन बारिश नहीं हुई। उमस से राहत जरूरत मिली। अधिकतम तापमान में दो डिग्री और न्यूनतम तापमान में पांच डिग्री की कमी दर्ज की गई।
ताखा क्षेत्र के ग्राम नगला चती निवासी किसान राजेंद्र सिंह ने बताया बरसात समय पर न हुई तो बुआई पिछड़ जाएगी। गंगा दशहरा तक मक्का की बुआई हो जाती थी। कल्यानपुर के किसान आशाराम ने कहा कि धान की नर्सरी को नुकसान हो रहा है। गर्मी की वजह से नर्सरी का जमाव 50 फीसदी तक है।
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41 मिलीलीटर बारिश हो जानी चाहिए थी
जिला कृषि अधिकारी अभिनंदन सिंह का कहना है अब तक धान की फसल के लिए खेत तैयार हो जाने चाहिए थे। खेत की तैयारी के लिए कीड़े, मकोड़े और खरपतवार खत्म हो जाते। कहा इस समय 41 मिली लीटर बारिश हो जानी थी, लेकिन एक बूंद पानी नहीं गिरा। पिछले साल 23 जून तक 17 मिली लीटर बारिश हो चुकी थी। बताया धान की रोपाई लेट होने की वजह से दलहन और तिलहन को बढ़ावा मिलेगा। वैसे भी इस बार धान का रकबा 50 हजार हेक्टेयर है जो पिछले साल 54 हजार हेक्टेयर था।
दलहन- तिलहन की ओर अग्रसर हों किसान
जिला कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ.विजय बहादुर जायसवाल का कहना है धान की रोपाई बारिश न होने से अभी शुरू नहीं हो पाई है। ऐसे में किसान दलहन व तिलहन की अग्रसर होकर उर्द, मूंग और अरहर की बुआई कर सकते हैं।
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