फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

सरकारी मुआवजे को काफी कम बता रहे किसान

Wed, 18 Mar 2015 12:03 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, इटावा
विज्ञापन
विज्ञापन
आसमान से बरसी आफत ने खेतों में खड़ी फसलों को तबाह कर दिया है। भारी नुकसान का झटका सहने के बाद किसानों को सरकार से उम्मीद थी, लेकिन मदद का जो ऐलान हुआ है उससे निराशा हुई है। सरकार की घोषणा से किसान खुश नहीं हैं। किसानों का कहना है कि सरकार ने जितना मुआवजा देने का ऐलान किया है उससे लागत तो दूर सिंचाई का भी पैसा नहीं निकलेगा।
विज्ञापन


बारिश और ओलावृष्टि ने फसलों को पूरी तरह से तबाह कर किया है। नुकसान का आंकलन भले नहीं हुआ हो, लेकिन अफसरों ने अनुमान 60 से 70 प्रतिशत तक लगाया है। प्रदेश सरकार ने भी किसानों को राहत देने की कोशिश की है। प्रदेश सरकार की ओर से 200 करोड़ की राहत राशि घोषित कर दी गई है।

वहीं मुख्य सचिव आलोक रंजन ने सरकार की ओर से सिंचित जमीन पर 9 हजार रुपये तथा असिंचित जमीन पर 4500 रुपये प्रति हेक्टेयर भुगतान का ऐलान कर दिया है। सरकार की इस मुआवजा राशि को किसान बहुत कम मान रहे हैं। किसानों का कहना है कि सरकार को लागत का आंकलन करके मुआवजा राशि की घोषणा करनी चाहिए थी।
विज्ञापन


एक लाख लागत, कैसे मिले राहत
जिले में करीब साढे़ 17 हजार हेक्टेयर रकबे में आलू की बुवाई की गई थी। 60 से 65 प्रतिशत आलू की खुदाई हो गई, शेष फसल खुदने को बाकी थी। बारिश ने आलू को काफी नुकसान पहुंचाया है। किसानों का कहना है कि एक आलू की फसल में प्रति हेक्टेयर कम से कम एक लाख रुपये का खर्च आता है।
सिर्फ 9 हजार के मुआवजे से पीड़ित किसानों को कैसे राहत मिलेगी। एक बीघा में करीब आलू का बीज पांच से छह पैकेट लगता है। इस हिसाब से प्रति हेक्टेयर 60 से 70 पैकेट बीज बोया गया। वर्तमान में एक हजार से 13 सौ रुपये प्रति कुंतल किसानों ने आलू का बीज खरीदा।

यानी 70 हजार रुपये के आसपास प्रति हेक्टेयर बीज हो गया। इसके साथ ही सौ से 120 रुपये प्रति घंटा की सिंचाई की। लेबर, खाद और दवाओं का खर्च मिलाकर एक हेक्टेयर आलू की बुवाई में एक लाख तक खर्च आया।

गेहूं किसान भी रहेंगे घाटे में
सरकार की मुआवजा राशि गेहूं किसानों को भी कोई राहत नहीं दे पाएगी। नौ हजार प्रति हेक्टेयर की मुआवजा राशि पाने के बाद भी किसान घाटे में ही रहेंगे। किसानों का कहना है कि प्रति हेक्टेयर गेहूं बुवाई की लागत 35 हजार रुपये के आसपास आई। इसके साथ ही सरसों सहित सब्जियों को भी भारी नुकसान हुआ है। सरकारी राहत को किसान न के बराबर मान रहे हैं।
विज्ञापन


विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें