सैफई। करोड़ों रुपये खर्च करने के बाद भी किसानों को कृषि से संबंधित सामान खरीदने के लिए बाजार नहीं मिल सका है। हालात ये हैं कि किसान आज भी भटकने को मजबूर है। इस किसान बाजार में किसानों का कोई काम नहीं हो रहा है।
सैफई महोत्सव स्थल के पास 16 बीघा भूमि पर 25 करोड़ की लागत से वर्ष 2013 में तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश ने किसान बाजार की नींव रखी थी।
मंडी समिति जसवंतनगर ने वर्ष 2016 में यहां बनी 104 दुकानें और आधुनिक रेस्त्रां का आवंटन कर दिया। अब हालात ये हैं कि यहां आधे से अधिक दुकानें बंद पड़ी हैं।
दरअसल किसान बाजार के नाम पर किसानों के लिए आवंटित होने वाली यह दुकानें किसानों को मिली ही नहीं हैं। लोगों की माने तो मंडी परिषद के अधिकारियों ने मिलीभगत करके ऐसे लोगों को दुकानें आवंटित कर दी।
जिन्होंने मंडी परिषद को निर्धारित प्रीमियम की धनराशि अभी तक जमा नहीं की है और अन्य लोगों को किराये पर दुकानें उठाकर उनसे किराया वसूला रहे हैं।
बाजार में 70 किसानों के लिए बने टीन शेड के पक्के फड़ वाले चबूतरे भी सूने पड़े हैं। प्रगतिशील किसानों ने बताया कि इस बाजार को एग्री मॉल का रूप दिया गया है।
यानी ऐसा बाजार जहां किसानों को लाइब्रेरी, बीज, खाद और कृषि यंत्र आदि सभी जरूरी सामान मिलते। किंतु अभी तक यहां एक भी ऐसी दुकान नहीं खुली है, जो किसानों की जरूरतों को पूरा कर सके।
बाजार में विश्राम गृह, रेस्तरां, साइबर कैफे के साथ शादियों के लिए बैंक्वेट हॉल तो बनाया गया है लेकिन उपयोग नहीं हो रहा है। एग्री मॉल में घर गृहस्थी का सामान भी मिलना था। कार पार्किंग एरिया व बच्चों के लिए झूले भी लगाए जाने थे जो आज तक लगे नहीं देखे गए। (संवाद)
किसान बाजार सैफई के लिए अब तक रखरखाव और मरम्मत पर किसी भी प्रकार का कोई बजट सरकार से प्राप्त नहीं हुआ है। वहीं दुकानों का आवंटन किया जा चुका है, अब आवंटी दुकानें नहीं खोल रहे हैं। इस पर जल्द कार्यवाही की जाएगी। - रविंद्र सिंह यादव प्रभारी सचिव मंडी