इटावा। प्रदेश शासन ने सात साल से उधार पड़े चार शेरों का गुजरात सरकार से तकादा कर दिया है। इसके लिए करीब 20 दिन पहले प्रदेश शासन की ओर से गुजरात सरकार को पत्र भी भेज दिया गया है। जल्द ही सफारी के डायरेक्टर भी गुजरात जाएंगे।
वर्ष 2012 में उत्तर प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच समझौता हुआ था। इसमें गुजरात ने इटावा सफारी को 10 शेर देने की मंजूरी दी थी। इसमें पहली खेेप में चार और दूसरे में दो शेर कुछ महीनों के अंतराल में इटावा सफारी आ गए थे। इसके बाद गुजरात सरकार ने उत्तर प्रदेश से एक गैंडा और जेब्रा की मांग कर चार शेर भेजने से इनकार कर दिया था। जिस जेब्रा को गुजरात ने मांगा था उसकी मौत होने से लेनदेन लटक गया। यूपी ने शेरों का तकादा शुरू किया तो गुजरात ने फिर वही शर्त दोहरा दी। इस पर कानपुर चिड़ियाघर से एक गैंडा भेजा जा चुका है। इसके साथ ही प्रदेश सरकार ने अपने शेरों का तकादा तेज कर दिया है। करीब 20 दिन पहले शासन से एक पत्र गुजरात को लिखा गया है। जल्द ही एक कार्यक्रम के सिलसिले में सफारी के डायरेक्टर भी गुजरात जाने वाले हैं, वहां वह उधार पड़े शेरों के सिलसिले में भी चर्चा करेंगे।
नियम शिथिल करने पर भी हो चुकी है चर्चा
इटावा सफारी में 10 शेर और शेरनी के नियम को शिथिल करने के लिए डायरेक्टर ने जू अथारिटी आफ इंडिया को पत्र लिखा था। इस पत्र में हवाला दिया गया था कि छत्तीसगढ़ और असम की एक-एक सफारी दो-चार शेरों पर चल रही हैं फिर इटावा सफारी के लिए ही इतना सख्त नियम क्यों। सूत्रों के अनुसार असम व छह की सफारी का लोकार्पण प्रधानमंत्री मोदी से करवाने के लिए वहां की सरकारों ने नियम शिथिल करवा लिए थे। अपने पत्र में इटावा सफारी के निदेशक ने यही तर्क दिए थे। 10दिन पहले जू अथारिटी की टेक्निकल कमेटी की बैठक में इटावा सफारी के लिए नियम शिथिल करने पर भी चर्चा हो चुकी है, हालांकि अभी अथॉरिटी का फैसला नहीं आया है। जल्द ही वहां से खुशखबरी मिल सकती है।
सफारी में कोई शेरनी गर्भवती नहीं
सफारी के निदेशक ने बताया कि इटावा सफारी में इस समय कोई भी शेरनी गर्भवती नहीं है। उन्होंने कहा कि मैंने इस तरह की कोई जानकारी भी किसी को नहीं दी है। गर्भवती है या नहीं इसकी जानकारी चिकित्सकों के पास होती है और किसी चिकित्सक ने मुझे अभी तक ऐसी खुशखबरी नहीं दी है।
तेंदुआ सफारी अभी शुरू नहीं होगी
डायरेक्टर ने बताया कि इटावा सफारी की तेंदुआ सफारी अभी शुरू नहीं होने जा रही है। उसमें काफी काम होना है। अभी तीन तेंदुआ हैं। एक साल पहले कानपुर चिड़ियाघर से तेंदुआ मंगाने के लिए पत्र लिखा था। वह पत्र ठंडे बस्ते में चला गया। हाल फिलहाल वहां से ऐसा कोई जवाब भी नहीं आया है और न ही किसी तरह की चर्चा ही हुई है। डाफिन बियर भी पूर्वोत्तर से मंगाने का मामला पुराना हो चुका है। बहुत पहले पत्र लिखा गया था लेकन फिलहाल कुछ नहीं हुआ है।
फिलहाल यह है लायन सफारी का मानक
इटावा सफरी में बनी लायन सफारी में 10 शेर-शेरनी की शर्त है। इसमें एक नर, चार मादा या दो नर और पांच मादा होने चाहिए। अभी मादा शेरों की संख्या कम है। इससे सफारी आम जनता के लिए नहीं खुल पा रही है।
हमारा सबसे ज्यादा जोर लायन सफारी शुरू करने का है। एक तो सफारी के 10 शेर-शेरनी के नियम को शिथिल करने के लिए पत्र लिखा जा चुका है। दूसरे कोशिश है कि गुजरात में उधार पड़े हमारे शेर मिल जाएं। हमने पत्र व्यवहार शुरू कर दिया है। उधर, से भी सकारात्मक संकेत मिल रहे हैं। अगर गुजरात जल्द शेर देने पर राजी जाता है तो हम उनसे तीन शेरनी और एक शेर मांगेंगे। अगर तीन शेरनी मिल गईं तो हमारा मानक पूरा हो जाएगा और सफारी तुरंत आम लोगों के लिए खुल जाएगी।
- वीके सिंह, डायरेक्टर इटावा सफारी