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संस्कारित कर्तव्य निर्वाहन से होता है राष्ट्र निर्माण: पदमश्री बाबा योगेंद्र 11

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संस्कार भारती के संस्थापक पदमश्री बाबा योगेंद्र को सम्मानित करते स्थानीय पदाधिकारी - फोटो : ETAWAH
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इटावा। कला साधकों का राष्ट्रव्यापी समूह खड़ा करने वाले संस्कार भारती के संस्थापक पदमश्री सम्मानित बाबा योगेंद्र ने वर्तमान में भारतीय समाज में तेजी से व्याप्त हो रहे सांस्कृतिक प्रदूषण को रोकना समय की सबसे बड़ी जरूरत बताया है। उनका कहना है कि संस्कारों की संकल्पवाही युवा पीढ़ी की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है कि वह राष्ट्र को एक सूत्र में पिरोकर रखे।
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बाबा योगेंद्र ने लालपुरा में प्रेस वार्ता के दौरान कहा कि 1981 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने कला व साहित्य के क्षेत्र में कला साधकों को तैयार करने के लिए संस्कार भारती का गठन किया था। वर्षों के अभ्यास और परिश्रम से व्यक्ति जीवन में कोई कला सिद्ध कर पाता है। उन्होंने संस्कार भारती संस्था को राष्ट्र मंदिर के शीर्ष का पावन कलश बताया।
फर्रुखाबाद में राज्यपाल उत्तर प्रदेश के कार्यक्रम में बुलावे पर उपस्थिति के पश्चात राष्ट्रीय कार्यालय आगरा को वापसी करते हुए बाबा योगेंद्र इटावा में दो घंटे रुके। उन्होंने यहां संस्कार भारती इटावा इकाई के पदाधिकारियों एवं सदस्यों के वार्ता की।
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यहां इटावा संस्कार भारती के जिलाध्यक्ष अश्वनी कुमार मिश्र, सचिव अत्रि दीक्षित, सहसचिव प्रशांत दीक्षित, नरेंद्र सोनी, योगेश कटियार, बंटू तिवारी, प्रखर, प्रज्ञा ने उनका स्वागत किया।
कोरोना संक्रमण के हालिया परिदृश्य तथा आने वाले समय में संस्कार भारती की क्या भूमिका रहेगी। इस प्रश्न के उत्तर में उन्होंने बताया कि संस्कार भारती कला साधकों को तैयार करके उनका सहयोग और संवर्धन आर्थिक मदद करके करेगी। कहा कि युवाओं को जाति और धर्म से ऊपर देश को रखना चाहिए।
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