जिला अस्पताल परिसर में स्थित ब्लड बैंक
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इटावा। जिले में रक्तदान के प्रति लोगों के आगे न आने से गर्भवतियों और हादसों में घायल मरीजों की जान पर बनती दिख रही है। क्योंकि जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में केवल चार यूनिट ही रक्त बचा है, जबकि प्रतिदिन औसतन 10 यूनिट रक्त की जरूरत पड़ती है।
जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में 450 यूनिट ब्लड रखने की क्षमता है। अप्रैल 2019 से जनवरी 2020 तक अलग-अलग संस्थाओं ने 13 रक्तदान शिविर लगाए। इसमें 332 लोगों ने रक्तदान किया। 2251 लोगों ने जरूरत पड़ने पर अपने सगे संबंधियों को रक्त दिया या फिर रक्त देेकर ब्लड बैंक से एक्सचेंज किया। जागरुकता न होने से जिला अस्पताल में केवल चार यूनिट खून बचा है। एबी पॉजिटिव ग्रुप का एक यूनिट, ओ पॉजिटिव तीन यूनिट खून है। अन्य ग्रुप का खून ब्लड बैंक में नहीं। सीएमएस डॉ. एसएन भदौरिया ने बताया कि जिला अस्पताल की ब्लड बैंक से औसतन प्रतिदिन 10 यूनिट रक्त की जरूरत पड़ती है। इस अनुपात में वर्ष भर में 3650 यूनिट रक्त चाहिए होता है। सबसे ज्यादा रक्त दुघर्टनाओं के शिकार लोगों और गर्भवती महिलाओं के लिए पड़ती है। सीएमएस ने कहा कि रक्तदान जागरुकता के लिए प्रयास लगातार किए जा रहे हैं।
रक्तदान सबसे बड़ा दान है, क्योंकि रक्तदान ने किसी की जिंदगी बचाई जाती है। 18 से 60 वर्ष तक आयु का कोई भी व्यक्ति रक्तदान कर सकता है। छह महीने में एक बार यानी वर्ष में दो बार रक्तदान किया जा सकता है। डॉ. एसएन भदौरिया ने बताया कि रक्तदान करने से किसी तरह की कोई कमजोरी नहीं आती है। बल्कि रक्तदान करने से हृदयाघात समेत कई बीमारियों से बचा जा सकता है।
ब्लड बैंक में रक्त की कमी को दूर करने के लिए जल्द ही 28 पीएसी बटालियन में रक्तदान शिविर का आयोजन किया जाएगा। करीब 30 यूनिट खून प्राप्त हो सके। लोगों में जागरुकता लाने के लिए अभियान भी चलाया जाएगा।
- डॉ. एनएस तोमर, सीएमओ