फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

समस्याएं नहीं सुनीं तो धरने पर बैठ गए प्रधान

विज्ञापन
विकास भवन परिसर में धरने पर बैठे प्रधानों के बीच सीडीओ राजा गणपति आर पहुंचे और जमीन पर बैठकर उनकी - फोटो : ETAWHA
विज्ञापन
इटावा। जल जीवन मिशन योजना की जानकारी के लिए बुलाई गई बैठक में डीएम, सीडीओ नहीं पहुंचे और डीडीओ ने प्रधानों की समस्याएं नहीं सुनीं। इससे नाराज होकर ग्राम प्रधान विकास भवन परिसर में ही जमीन पर बैठ गए। जिला पंचायत अध्यक्ष अंशुल यादव भी प्रधानों के बीच पहुंच गए। प्रधानों के नाराज होने की खबर मिलने पर सीडीओ विकास भवन पहुंचे और जमीन पर बैठकर उनकी समस्याएं सुनीं फिर प्रतिनिधिमंडल के साथ अपने कक्ष में बैठकर वार्ता की। इसमें नियमानुसार समस्याएं दूर करने का आश्वास दिया।
विज्ञापन

जल जीवन मिशन के तहत केंद्र सरकार ने 2024 तक प्रत्येक घर तक शुद्ध पेयजल पहुंचने का लक्ष्य रखा है। इस मिशन के तहत प्रत्येक गांव में गहरे बोर और टंकियां बनाकर घर-घर तक जालपूर्ति सुनिश्चित करना है। जिलाधिकारी जेबी सिंह जिले में इस मिशन के नोडल अधिकारी हैं। उन्होंने बुधवार को 11 बजे विकास भवन सभागार में सभी 471 ग्राम प्रधानों की बैठक बुलाई थी। 11 बजे ग्राम प्रधान बैठक में पहुंच गए, लेकिन जिलाधिकारी जेबी सिंह और सीडीओ राजा गणपति आर नहीं पहुंचे। बैठक में डीडीओ ... मौजूद थे। प्रधान उनके समक्ष भुगतान न होने और विकास कार्यों में अड़चने संबंधी समस्याएं रखने लगे। डीडीओ ने समस्याएं सुनने में असमर्थता जताई तो प्रधान बैठक छोड़कर बाहर निकल आए और जमीन पर धरने में बैठ गए। करीब 12 बजे जिला पंचायत अध्यक्ष अंशुल यादव भी प्रधानों के बीच पहुंचे और धरने पर बैठ गए। प्रधानों की नाराजगी की खबर मिलने पर दोपहर करीब 12:45 बजे सीडीओ विकास भवन पहुंचे और प्रधानों के साथ ही जमीन पर बैठ गए। उन्होंने प्रधानों से उनकी समस्याएं पूछीं। सीडीओ ने कहा कि प्रधान मेरे परिवार के सदस्य हैं, उनके साथ कहीं भी बैठने में मुझे कोई भी दिक्कत नहीं है। सभी की समस्याएं सुलझाई जाएंगी। इसके बाद सीडीओ ने अध्यक्ष जिला पंचायत और प्रधान संघ अध्यक्ष राजेंद्र ऋषिश्वर और कुछ प्रधानों के साथ अपने कक्ष में बातचीत कर समस्याओं के निराकरण का आश्वासन दिया।
प्रधान बोले,
पंचायत सचिव ने मीटिंग में आने को कहा था, 11 बजे का समय था। समय पर हम लोग पहुंच गए लेकिन यहां कोई बड़ा अधिकारी नहीं मौजूद था। किसी ने समस्याएं नहीं सुनीं, मजबूरन धरने पर बैठना पड़ा।
विज्ञापन

- लाखन सिंह, ग्राम प्रधान, अधीनी, ताखा
.......................
प्रधानों पर जबरिया काम थोपा जा रहा है। ग्राम सभा में प्रस्तावित काम नहीं करा पा रहे हैं। जनता से काम का दबाव है। भुगतान छह-छह महीने नहीं होता है। डोंगल काम नहीं करता, क्या करें। कोई नहीं सुनता तो हम कहां जाएं।
- प्रेमचंद्र शाक्य, ग्राम यशीनगर, बसरेहर
....................................
जल मिशन योजना में 10 प्रतिशत सहायता राशि जनता से जुटाने की शर्त रख दी है। अब हम किससे पैसा मांगे। 14वें वित्त आयोग के निर्माण में मजदूरी मनरेगा से कर दी गई है। सीसी रोड बनाने में मिक्चर मशीन बाहर से मंगाते हैं, बाहर के मजदूर होते हैं। उनका हमारे गांव में जाबकार्ड नहीं तो भुगतान कैसे करें। सारे काम बंद हैं।
- नीरू यादव, ग्राम उदयपुरा, बसरेहर
....................................
14वें वित्त के काम में मनरेगा से भुगतान होने से दिक्कत आ रही है। भुगतान छह-छह महीने नहीं होता है। इससे भट्टे से ईंट और दुकानों से सीमेंट, मौरंग नहीं मिलती है। काम न होने से जनता नाराज हो रही है। चुनावी वर्ष हैै, काम का दबाव है लेकिन कहीं सुनवाई नहीं हो रही है।
- अवधेश कुमार, ग्राम धौरखा, महेवा
....................................
गांवों की गलियां और नालियों के निर्माण व मरम्मत के प्रस्ताव काफी पहले दे दिए थे। वह काम प्राथमिकता में होने चाहिए लेकिन अधिकारी पहले स्कूलों में ंकाम कराने का दबाव डाल रहे हैं। गांव के लोग पहले गलियां व नालियां बनवाने पर जोर दे रहे हैं। हमे जनता को भी जवाब देना है।
- राजकुमार सिंह, ग्राम संगावली, बढ़पुरा
------------------------------
मनरेगा के भुगतान में मांगा जाता कमीशन : मलखान सिंह
कांग्रेस जिलाध्यक्ष मलखान सिंह यादव सराय ऐसर गांव के प्रधान हैं। उन्होंने कहा कि छत्तीगढ़ के मजदूरों से काम करा रहेे हैं। भुगतान के लिए गांव के मजदूरों के खाते में डालते हैं। उन मजदूरों के खाते से पैसा निकालकर छत्तीगढ़ के मजदूरों का भुगतान होता है, इसमें अधिकारी कमीशन मांग रहे हैं। मलखान ने कहा कि 14वें वित्त के काम मनरेगा मजदूर से कराने के बाद भी भुगतान में भी दिक्कत है। इसके लिए मेट के खाते में सभी मजदूरों का पैसा डाल दिया जाए, तो निराकरण हो सकता है।
स्कूलों में अब काम नहीं कराएंगे : रिषिश्वर
ग्राम प्रधान संघ के जिलाध्क्ष राजेंद्र ऋषिश्वर ने कहा कि प्रत्येक गांव को 5-5 पशु शेड दिए जा रहे हैं। मनरेगा से काम करना है और भुगतान बाद में होगा। प्रत्येक पशु शेड पर करीब 90 हजार का खर्च है। चुनावी साल में कोई उधार सामान देगा नहीं तो काम कैसे करा लेंगे। प्रत्येक पंचायत के दो-तीन स्कूलों में काम कराया जा चुका है। अब फिर स्कूलों में काम का दबाव है। हम लोग पहले गांवों में विकास कार्य कराएंगे अगर उसमें पैसा बचता है तभी स्कूलों में काम कराएंगे। अधिकारियों ने दबाव डाला तो अब बड़ा आंदोलन किया जाएगा।
इनसेट
कुछ इंजीनियर काम के नहीं
प्रधानों से बातचीत में एमबी न होने की समस्या भी उठी। इस पर सीडीओ ने कहा कि हमारे कुछ इंजीनियर काम के नहीं हैं लेकिन क्या करें। जो काम करने वाले हैं उनके जरिये एमबी व अन्य काम कराए जा रहे हैं।
वर्जन
मंडलायुक्त का दौरान होने से जिलाधिकारी और मुझे उनके साथ जाना पड़ गया। प्रधान और सभी जनप्रतिनिधि सम्मानित हैं, उनकी बातें सुनना हमारा कर्तव्य है और हमने सुनीं। प्रधानों के कुछ सुझावों पर विचार किया जा रहा है, जल्द ही उनकी समस्याएं दूरी हो जाएंगी। -राजा गणपति आर, सीडीओ
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें