इटावा। हवन पूजन के साथ रविवार को इटावा महोत्सव का शुभारंभ किया गया। शहीद स्मारक के तले राष्ट्रगान हुआ और जिलाधिकारी श्रुति सिंह ने भरथना विधायक सावित्री कठेरिया की मौजूदगी में वैदिक मंत्रोच्चार के साथ हवन-पूजन किया। यहां पर पुलिस के बैंड ने विभिन्न धुनों पर गीत प्रस्तुत किए। इसके बाद डीएम, विधायक, प्रशासनिक अधिकारियों व महोत्सव कार्यकारिणी सदस्यों ने महोत्सव पंडाल में मां सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित किया।
प्रदर्शनी के जनरल सेक्रेटरी व एसडीएम सदर सिद्घार्थ ने ठेकेदारों, दुकानदारों, कर्मचारियों आदि के प्रति आभार व्यक्त किया। महोत्सव कार्यकारिणी के पदाधिकारियों शांतिस्वरूप पाठक, गिरौज नारायण अग्रवाल आदि ने डीएम को इस आयोजन के लिए पूरी कार्यकारिणी की ओर से धन्यवाद ज्ञापित किया। प्रखर गौड़ ने सरस्वती वंदना ‘मैं अबोध हूं बोध करा दे’ से सांस्कृृतिक कार्यक्रमों की शुरुआत की तो राजीव द्विवेदी ने महोत्सव व जिले की विशेषताएं सहेजे गीत प्रस्तुत किया। इसके बाद विशंभर नाथ भटेले ने काव्य पाठ किया और शायर रौनक इटावी ने ‘फिर नुमाइश आई है’ उद्घाटन गीत गाया। कार्यक्रम का संचालन जनपद के विख्यात साहित्यकार डा. कुश चतुर्वेदी ने किया। इसके बाद डीएम ने इंदिरा चौक में पूरी प्रदर्शनी की प्रकाश साज-सज्जा का बटन दबाकर उद्घाटन किया तो पूरा प्रदर्शनी परिसर रंग-बिरंगी रोशनी में चमक उठा। इस दौरान सिटी मजिस्ट्रेट उमेश चंद्र मिश्र, एडीएम जय प्रकाश, एसडीएम जसवंतनगर ज्योत्सना बंधु व भरथना नम्रता सिंह, महोत्सव कार्यकारिणी सदस्य एड. गुरुमुख सिंह अरोड़ा, विधायक प्रतिनिधि गोपाल मोहन शर्मा, आदि मौजूद रहे।
‘कलर्स ऑफ इंडिया’ से सजा महोत्सव का मंच
शुभारंभ व स्वागत कार्यक्रम के बाद अब बारी थी महोत्सव मंच पर सांस्कृतिक कार्यक्रमों के आयोजनों की। लखनऊ के फ्रेंड्स ईवेंट के कलाकारों ने देश के विभिन्न राज्यों के लोक नृत्यों की एक के बाद एक झलक प्रस्तुत की तो पंडाल संस्कृतिमय हो गया। सांस्कृतिक संध्या ‘कलर्स ऑफ इंडिया’ में इन कलाकारों ने गणेश वंदना पर नृत्य प्रस्तुति दी और इसके बाद उत्तर प्रदेश का कत्थक व जम्मू-कश्मीर के लोक नृत्य रौफ की बूमरो-बूमरो गाने पर प्रस्तुति दी। असम के लोक नृत्य बिहू, राजस्थान के कालबेलिया, गुजरात के गरबा, महाराष्ट्र के लावणी, पंजाब के भांगड़ा और बॉलीवुड की प्रस्तुति से महोत्सव में खनक पैदा कर दी। अंत में देश के इन सभी राज्यों की प्रस्तुति देने वाले कलाकारों ने एक साथ मंच पर आकर साझा प्रस्तुति दी।
बोलीं डीएम
हमारे त्योहारों जैसा ही है जिसके लिए इटावा ही नहीं आसपास के जनपदवासी भी बेसब्री से इंतजार करते हैं। ऐसे आयोजन एक प्रगतिशील समाज की पहचान होते हैं जो हमें अपने साथ बांधे रखते हैं। कोविड के चलते इस आयोजन में लगभग एक माह का विलंब हुआ, लेकिन 111 साल की परंपरा निभा सकने पर महोत्सव समिति को हर्ष है। दुकानदारों, व्यापारियों व जनता की मांग पर यह महोत्सव का आयोजन करना जरूरी समझा गया। यहां पर स्थानीय प्रतिभाओं को मंच मिलता है तो यहां के दर्शकों को बाहर के कलाकारों की प्रतिभाएं देखने का अवसर मिलता है। यह बात जिलाधिकारी श्रुति सिंह ने महोत्सव पंडाल में इटावा महोत्सव एवं प्रदर्शनी का औपचारिक शुभारंभ करते हुए कही।