चकरनगर। कोरोना के चलते कार्तिक पूर्णिमा पर पचनद संगम पर इस बार दो दिवसीय मेला नहीं लगेगा। हालांकि पांच नदियों के संगम में श्रद्धालु स्नान कर सकेंगे। उत्तर प्रदेश ही नहीं मध्य प्रदेश और राजस्थान तक से लाखों श्रद्धालु आकर संगम में स्नान कर भगवान भोलेनाथ की आराधना करते हैं।
पचनद संगम में स्नान व मंदिर में पूजा के लिए संपूर्ण तैयारियां की गईं हैं। श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की समस्याओं का सामना न करना पड़े। सोशल डिस्टेंसिंग का उल्लंघन न हो जिसके लिए पुलिस प्रशासन मुस्तैद है। स्नान पर्व पर कोरोना संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए संदिग्ध लगने वाले श्रद्धालुओं की कोविड सैंपलिंग की जाएगी। थाना अध्यक्ष विठौली बलराज शाही ने बताया कि संगम में स्नान करने की छूट दी गई है। यह प्राचीन काल से आस्था का केंद्र रहा है। मेले के आयोजन पर रोक लगा दी गई है। घाटों की सुरक्षा के लिए पर्याप्त व्यवस्थाएं की जा रही हैं।
धार्मिक मान्यता है कि द्वापर में भगवान विष्णु ने कार्तिक पूर्णिमा के दिन मायाश्री और भगवान भोलेनाथ की आराधना कर जन कल्याण के लिए सुदर्शन चक्र पर पचनद संगम पर ही धारण किया था। मान्यता है देश दुनिया की सबसे पावन जगह पचनद संगम में कार्तिक पूर्णिमा पर स्नान व भोलेनाथ का ध्यान करने से मनोवांछित लाभ मिलता है।
बाबा मुकुंद वन की तपोभूमि पचनद संगम पर गोस्वामी तुलसीदास ने श्री रामचरितमानस के कुछ अंश यहां पर लिखे थे। पचनदा संगम को तीर्थराज की भी मान्यता दी गई है। आस्थावान लोग बताते हैं कि कार्तिक पूर्णिमा के दिन भगवान कार्तिक की पूजा अर्चना की जाती है। वे दक्षिण दिशा के स्वामी हैं। आज के दिन पवित्र नदी में स्नान करने से पापों का मुक्ति होती है। दीपदान और गोवंश दान करने की भी महत्ता है। देव दीपावली को ब्रह्म मुहूर्त में संगम में स्नान करने के बाद चंद्रमा को जल अर्पण किया जाता है। सभी देवी देवताओं को समर्पित हो जाता है।
पचनंद कालेश्वर मंदिर कार्यवाहक महंत किशोर वन ने बताया कि प्रशासन की तरफ से मेले के आयोजन पर रोक लगा दी गई है। सुदूर से आने वाले श्रद्धालुओं और साधुओं के लिए संपूर्ण व्यवस्था मंदिर की ओर से की गई है। स्नान ध्यान के लिए पूर्ण तरह घाटों को अलग-अलग हिस्सों में बांट दिया गया है। सुदूर से आने वाले आम श्रद्धालुओं के लिए भी ठहरने की व भोजन की व्यवस्था की गई है। मंदिर में पूजा के दौरान सभी लोग सोशल डिस्टेंसिंग का पालन किया जाएगा।
मंदिर कमेटी के आजीवन सदस्य राजेंद्र सिंह परिहार ने बताया कि स्नान ध्यान पूजा अर्चना के लिए चाक-चौबंद व्यवस्था की जा चुकी है। श्रद्धालुओं को किसी तरह की समस्या न हो।