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बिना विशेषज्ञ डॉक्टर तीसरी लहर से लड़ने की तैयारी

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50 शैय्या अस्पताल में बना ऑक्सीजन प्लांट - फोटो : ETAWAH
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बकेवर। ओमिक्रॉन के बढ़ते मामले और तीसरी लहर की आशंका के बीच कस्बे के 50 बेड के अस्पताल में तैयारियां जोर-शोर से की जा रहीं हैं। लेकिन ये तैयारी आधी-अधूरी हैं। इस अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टर नियुक्त नहीं किए गए हैं। इसके अलावा कई जांच संबंधी उपकरण और स्वास्थ्य कर्मचारियों की कमी है। हालांकि अस्पताल में ऑक्सीजन प्लांट चालू कर दिया गया है।
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बकेवर के 50 शैय्या अस्प्ताल में बनाए गए ऑक्सीजन प्लांट से ऑक्सीजन वार्ड में जाना शुरू हो गया है। हाल में अस्पताल में ऑक्सीजन प्लांट चलाने के लिए मॉकड्रिल की गई थी। लखनऊ से आए जेडी डेंगू डॉ. विकास सिंघल की मौजूदगी में हुई मॉकड्रिल होने के दौरान ऑक्सीजन प्लांट से ऑक्सीजन की सप्लाई वार्ड में होने में समस्या हुई थी। ऑक्सीजन प्लांट का निर्माण करने वाली कंपनी के इंजीनियर ने प्लांट की पड़ताल की थी। इंजीनियर वीरेंद्र शर्मा ने बताया कि प्लांट के पांचों वाल्व काम नहीं कर रहे थे। प्लांट काफी दिन तक चलाए न जाने से यह कमी आई थी। उनको बदल दिया गया है। वाल्व बदले जाने के बाद ऑक्सीजन की सप्लाई शुरू हो गई है।
दो डॉक्टर के सहारे अस्पताल
वर्तमान में अस्पताल में दो चिकित्सक तैनात हैं। इनमें एक फिजिशियन और एक डेंटिस्ट हैं। इसके अलावा सीएमओ ने अस्पताल के सुचारु रूप से चालू करने के लिए सप्ताह के सातों दिन के लिए एक-एक विशेषज्ञ चिकित्सक की ड्यूटी लगाई गई थी। ड्यूटी लगाए जाने के बाद उनमें से अधिकांश चिकित्सक मरीजों को देखने नहीं आ रहे हैं। अस्पताल में खून की जांच के लिए लैब सहायक सतेंद्र की नियुक्ति कर दी गई लेकिन जांच संबंधी उपकरण व अन्य केमिकल नहीं भेजा गया है। इस अस्पताल में एलाइजा मशीन भी लगाई गई थी लेकिन तीन महीने पहले उसे जिला मुख्यालय मंगा लिया गया है। कोरोना की तीसरी लहर के आने की आशंका को देखते हुए इस 50 शैया अस्पताल में बच्चों के लिए 12 बेड के दो पीकू वार्ड बनाए गए हैं। अस्पताल में बाल रोग विशेषज्ञ के न होने से ओमिक्रॉन वैरिएंट के प्रकोप के फैलने से उसे नियंत्रित करने में समस्या आ सकती है।
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