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आत्मा की शुद्धि का पर्व है क्षमावाणी: प्रमुख सागर

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विश्व जैन संगठन के अध्यक्ष को पटका पहनाते जैन समाज के अध्यक्ष संजीव जैन - फोटो : ETAWAH
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इटावा। जैन परंपरा में पर्यूषण (दशलक्षण) महापर्व के बाद क्षमा पर्व मनाया गया। दिगंबर जैन मंदिर लालपुरा में चातुर्मास कर रहे आचार्य प्रमुख सागर के सानिध्य में जैन धर्मावलंबियों ने एक दूसरे से वर्ष भर जाने अनजाने में गलतियों की क्षमा मांगी। सकल जैन समाज के अध्यक्ष संजीव जैन, मंदिर महामंत्री महेश चंद्र रपरिया व अन्य पदाधिकारियों ने उत्कृष्ट सामाजिक कार्य करने पर विश्व जैन संगठन के अध्यक्ष आकाशदीप जैन को पटका व पगड़ी पहनाकर प्रतीक चिह्न देकर सम्मानित किया।
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आचार्य प्रमुख सागर महाराज ने कहा जैन धर्म में क्षमा भाव को वीरों का आभूषण कहा गया है। क्षमा भाव धर्म का आधार है और यह सभी के लिए हितकारी होता है। इस दौरान जैन समाज की महिलाओं, बच्चों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए। दशलक्षण पर्व पर हुए सांस्कृतिक कार्यक्रमों के विजेता प्रतिभागियों को संजू जैन ने पुरस्कार प्रदान किए। जैन समाज के पुरुषों, महिलाओं, बच्चों ने जाने या अनजाने यदि संपूर्ण ब्रह्मांड के किसी भी सूक्ष्म से सूक्ष्म जीव के प्रति यदि कोई भी अपराध किया हो उसकी क्षमा मांगी।
कार्यक्रम में संगीता जैन, सीमा जैन, आनंद बाबा, रजत जैन, नीरज जैन, अभिनंदन जैन, विमल जैन, बोनू जैन, सुभाष जैन, अतिशय जैन, चंद्र प्रकाश जैन, मन्नू जैन आदि सकल जैन समाज उपस्थित रहा।
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