इटावा। जिले में यमुना और चंबल में बाढ़ की विभीषिका ने अपना कहर बरपाना शुरू कर दिया है। लगातार बढ़ रहे जलस्तर से हालात दिनों दिन बिगड़ रहे हैं। करीब 200 से अधिक गांव पानी से घिर चुके हैं। घरों और रास्तों में बाढ़ का पानी भरा हुआ है। चकरनगर और बढ़पुरा ब्लाक के गांवों का मुख्यालय से संपर्क टूट चुका है। यमुना में बाढ़ का पानी इटावा शहर के नजदीक तक पहुंच गया। मां कालीवांह मंदिर के सामने पानी भर चुका है। आसपास के इलाके में रहने वाले लोग अपना अपना घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर पलायन कर रहे हैं। शहर का शमशान घाट जाने वाले रास्ता पूरी तरह से डूब गया है। दोपहर दो बजे चंबल का जलस्तर 128.19 और यमुना का जलस्तर 122.92 मीटर मापा गया। चंबल खतरे के निशान से 8 मीटर और यमुना करीब 1 मीटर ऊपर बह रही है। बाढ़ से घिरे गांवों में नावों के सहारे लोगों को निकाला जा रहा है।
घरों में भरा पानी, कई गांवों का संपर्क मुख्यालय से टूटा
चकरनगर संवाद के अनुसार यमुना और चंबल की प्रलयकारी बाढ़ के आगे शासन प्रशासन की इंतजाम नाकाफी साबित होने लगे। निरंतर बढ़ते जलस्तर ने दशकों पुरानी बाढ़ के रिकॉर्ड को तोड़ दिया है। बाढ़ में डूबते गांवों में प्रशासन ने रेस्क्यू अभियान शुरू करते हुए ग्रामीणों को सुरक्षित स्थानों पर भेजना शुरू कर दिया है। जिलाधिकारी व एसपी ने बाढ़ ग्रस्त क्षेत्र का मुआयना कर राहत कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं। तहसील क्षेत्र की लगभग 50 हजार आबादी बाढ़ से प्रभावित हैं। पानी से घिरे लगभग 60 से अधिक गांव डूबने की कगार पर है। सहसों, भरेह, बिठौली थाना क्षेत्रों के मुख्य मार्गों में पानी होने से संपर्क कट गया है। बाढ़ चौकियों तक पहुंचने के लिए मुख्य मार्ग बंद है प्रशासन ने वैकल्पिक व्यवस्था के तहत नौकाओं को संचालन शुरू किया है। गंभीरता को देखते हुए बरेली से 30 सदस्यीय एसडीआरएफ टीम बुला ली गई है। टीम प्रभावित इलाकों में कैंप कर रही है।
करियावली गांव में मुख्य मार्ग पानी में डूब गया है। गांव का संपर्क पूरी तरह से कट चुका है। मचल की मड़ैया पूरा गांव खाली हो गया है। गांव में घरों में पानी भरा है। ग्रामीणों ने डोंगी के सहारे पूरा गांव खाली कर दिया। डीसीडीएफ निदेशक कुंवर गजेंद्र सिंह राजावत ने बाढ़ की विभीषिका को देखते हुए राहत और बचाव इंतजामों को नाकाफी बताया है।
हरौली गांव से एक सैकड़ा से अधिक लोगों को समान सहित एनडीआरएफ की टीम ने नावों से सुरक्षित औरैया जनपद के गौहानी गांव में भेजा है। धर्मपुरा गांव में बढ़ते जलस्तर को लेकर थानाध्यक्ष गोविंद हरी वर्मा ने मल्लाहों व पुलिस दल की मदद से भरेह किला परिसर में स्थापित करवाया। भरेह चकरनगर मुख्य मार्ग में दो जगह पुलियों पर 20 से 25 फुट ऊपर पानी होने के चलते संपर्क मार्ग कट गया है। 48 घंटे में पड़े जलस्तर ने पिछले कई दशकों का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। डिभौली, पाली, बछेड़ी, कुंदौल, ढकरा ,सहसों, आदि में बाढ़ का पानी घुस गया है। गांव के रास्ते पूर्णतया बंद हो गए हैं। देर शाम जिलाधिकारी श्रुति सिंह, एसएसपी डा.बृजेश कुमार ने सहसों सेतु से बाढ़ का आकलन किया। लखना सिंडौस मार्ग पुल के निकट स्थित ढकरा पुलिया पर नदी का पानी से क्षतिग्रस्त होने के चलते आवागमन रोका गया हैं।
लवेदी संवाद प्रतिनिधि के अनुसार यमुना किनारे बसे गांव मुचाई के प्राथमिक विद्यालय में पानी भर गया है। प्रधानाध्यापक ने शैक्षिक अभिलेखों को नाव से जाकर बाहर निकाला। यही हाल कछपुरा और लखनपुरा का है। लखना चकरनगर मार्ग से कछपुरा को जाने वाले मार्ग की पुलिया के डूबने से ग्राम प्रधान विकास कठेरिया ने नाव लगवा दी।
यमुना की बाढ़ से कई गांव बने टापू
बकेवर संवाद के अनुसार यमुना का जलस्तर और बढ़ने से नदी किनारे के कई गांव बुधवार रात तक पानी भरने के कारण टापू बन गए टकरूपुर ग्राम पंचायत के लखनपुरघार, कछपुरा, तीर की मढ़िया गांव के चारों तरफ पानी भरने से आवागमन का कोई रास्ता नहीं बचा। ग्राम मड़ैया मल्हान, पठा के बीच रास्ते पर अधिक पानी भरने से दोनों गांवों के बीच का आवागमन पूरी तरह से ठप हो गया है।
अभी और बढ़ेगा जलस्तर
यमुना में अभी पानी और बढ़ सकता है। क्योंकि नदी में कुछ पानी हथिनीकुंड बांध से छोड़ा गया है जो अभी यहां तक नहीं आ सका है। उसके गुरुवार देर रात या शुक्रवार सुबह तक आने की संभावना है। उस पानी के आने के बाद यमुना किनारे के गांवों में बाढ़ और अधिक हो जाएगी। शुक्रवार सुबह तक डिभोली पुल तक पानी पहुंचने की संभावना जताई जा रही है। जल स्तर और बढ़ने से इन गांवों के आसपास के कुछ अन्य गांव भी चपेट में आ सकते हैं।