यमुना नदी में रोहू, कतला, शीतल, सिंघाड़ा, मल्ली जैसी 50 प्रजातियों की मछलियां पाई जाती थीं। काफी समय से यमुना नदी में विभिन्न शहरों के गंदे केमिकल वाला पानी छोड़े जाने से कुछ ही प्रजाति की मछलियां अब शेष बची हैं।
इटावा के जसवंतनगर में यमुना नदी किनारे हजारों की संख्या मछलियां मरी मिलीं हैं। इनके मरने का कारण नदी में बढ़ता प्रदूषण या जल स्तर का कम होना माना जा रहा है। एसडीएम ने जांच कराने की बात कही है। बीहड़ी क्षेत्र के घुरहा जाखन गांव के कुछ ग्रामीण सुबह जब यमुना नदी किनारे गए तो अचानक बड़ी संख्या में मरी मछलियां देख हैरान रह गए।
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यमुना नदी में रोहू, कतला, शीतल, सिंघाड़ा, मल्ली जैसी 50 प्रजातियों की मछलियां पाई जाती थीं। काफी समय से यमुना नदी में विभिन्न शहरों के गंदे केमिकल वाला पानी छोड़े जाने से कुछ ही प्रजाति की मछलियां अब शेष बची हैं।
मछलियों के मरने की वजह अभी तक साफ नहीं हो पाई है। ग्रामीणों का मानना है कि यमुना का जल प्रदूषित होने के कारण मछलियां मर रही हैं। मरी हुई मछलियां तिलापिया प्रजाति की हैं।
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पानी में सिल्ट की मात्रा बढ़ जाने के कारण ऑक्सीजन की कमी भी एक कारण हो सकती है। उप जिलाधिकारी नंद प्रकाश मौर्य ने बताया कि भारी तादाद में मछलियों के मरने की जानकारी उनके संज्ञान में आई है। संबंधित विभाग को सूचित कर पॉल्यूशन और आक्सीजन की जांच कराई जाएगी।