इटावा। ईंट भट्ठा मजदूर ने नाबालिग बेटी से दुष्कर्म करने वाले सिपाही से करीब दो साल चली कानूनी जंग जीत ली। शुक्रवार को विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट ने सिपाही को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई। कोर्ट ने दुष्कर्मी पर 50 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है।
घटना एक नवंबर 2017 की है। जसवंतनगर थाने की पुलिस चौकी धरवार में कांस्टेबल के पद पर तैनात जितेंद्र सिंह पुत्र सत्यवीर सिंह की ड्यूटी रात को हाईवे के पास गांव की सुरक्षा में सरकारी जीप चालक के तौर पर लगाई गई थी। वह मूलरूप से मथुरा जिले के मगौरा थाना क्षेत्र स्थित नगला रतू बांछगांव का रहने वाला है। राज्य सरकार की ओर से मामले के पैरवीकर्ता विशेष लोक अभियोजक पॉक्सो दशरथ सिंह चौहान ने बताया कि 2 नवंबर 2017 को जितेंद्र के खिलाफ छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिलांतर्गत मस्तूरी थाना क्षेत्र निवासी ईंट भट्ठा मजदूर ने जसवंतनगर थाने में रिपोर्ट लिखाई थी। वह जसवंतनगर क्षेत्र में ही ईंट भट्ठे पर काम करता था। उसने बताया था कि उसकी 17 साल की बेटी भट्ठे पर लगी टंकी से पानी लेने गई थी। वहां पुलिस की गाड़ी खड़ी थी। उससे एक सिपाही उतरा और बेटी का हाथ पकड़ टंकी के बराबर खाली जगह ले जाकर दुष्कर्म किया। बेटी ने रोते हुए सारी बात उसे व अपनी मां को बताई थी।
पुलिस ने सिपाही जितेंद्र सिंह के खिलाफ दुष्कर्म की धारा 376 (2) व धारा 5/6 पॉक्सो एक्ट के तहत रिपोर्ट दर्ज की। पॉक्सो एक्ट के विशेष न्यायालय/अपर सत्र न्यायाधीश ने पीड़िता के बयान और गवाहों के आधार पर सिपाही को दुष्कर्म का दोषी पाया। विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट दिनेश कुमार चौरसिया ने शुक्रवार को सजा पर फैसला सुनाया।