चकरनगर। चंबल और यमुना नदी की बाढ़ में तबाह हुए लोगों के लिए शासन स्तर से दी जा रही मदद नाकाफी साबित हो रही है। सरकारी सर्वे में सिर्फ 25 फीसदी से अधिक नुकसान वाले लोगों को आर्थिक मदद का पात्र माना गया है।
इस मानक ने 50 फीसदी प्रभावितों को पात्रता सूची से अलग कर दिया है। पीड़ितों का कहना है कि जनप्रतिनिधियों ने भी बड़े आश्वासन दिए, लेकिन अब कोई दिखाई नहीं दे रहा।
14 गांव के बाढ़ पीड़ितों के खातों में आर्थिक सहायता भेज दी गई है। बाढ़ प्रभावित 17 गांव के पीड़ितों के अभिलेख उपलब्ध न कराने से सहायता राशि अटकी हुई है।
अगस्त के पहले हफ्ते में बाढ़ ने तहसील के 31 गांवों में भारी तबाही मचाई। पीड़ितों का कहना है कि प्रभारी मंत्री, सांसद और विधायक ने सहायता के बड़े बड़े दावे किए, बाढ़ का पानी गांवों से जैसे ही उतरा सभी नेता गायब हो गए।
इन गांवों के करीब 1400 से 1500 लोग बाढ़ के कारण सड़क पर आ गए हैं। शासन ने 25 फीसदी का मानक तय कर दिया। इस पर केवल 756 पीड़ितों को ही आर्थिक सहायता का पात्र माना गया। बाकी 50 फीसदी को शासन से कोई मदद नहीं मिलने वाली। ऐसे में इन परिवारों के सामने गंभीर संकट है।
खिरीटी गांव के अर्जुन सिंह बताते हैं कि नेताओं ने वादे किए थे कि हर पीड़ित को नुकसान की शत प्रतिशत भरपाई की जाएगी। जब मदद की दरकार तो नेता जी गायब हैं।
चक्रेश सिंह सेंगर भरेह का कहना है कि बाढ़ का पानी उतरने के साथ ही नेताओं का भी समाज सेवा का बुखार उतर गया। बाढ़ के समय अपनी छवि चमकाने के लिए नेता बड़े-बड़े वादे कर रहे थे, अब टेलीफोन करने पर भी नहीं आ रहे हैं।
आर्थिक सहायता के नाम पर महज 3200 से 5200 रुपये मिल रहे हैं। पूरा मकान क्षतिग्रस्त होने पर 95100 रुपये मिलेंगे, यह सहायता भी पर्याप्त नहीं है। इससे पीड़ितों का कुछ भला नहीं होने वाला। बाढ़ पीड़ित रानी देवी, विमला देवी, श्यामवती कहती हैं हम गरीबों के पास खाने-पीने के बर्तन, पहनने के कपड़े तक नहीं बचे हैं।
उप जिला अधिकारी चकरनगर सत्यप्रकाश ने बताया कि शासनादेश के अनुरूप 25 फीसदी से अधिक नुकसान वाले 31 गांवों में 756 पीड़ितों को पात्रता सूची में रखा गया है। सहायता राशि उनके खातों में भेजी जानी शुरू कर दी गई है।
अभी तक 14 गांव की सहायता राशि भेज दी गई है। शेष गांवों के कुछ लोगों के आधार, बैंक पासबुक आदि अभिलेख उपलब्ध न कराने से सहायता राशि खातों में भेजने में समस्या आ रही है।
तहसीलदार यदुवीर सिंह यादव और नायब संदीप सिंह ने बताया कि राजस्व विभाग के कर्मचारियों को गांवों में भेज कर अभिलेख मांगे जा रहे हैं। ग्राम प्रधानों से भी सहायता मांगी गई है।
बाढ़ पीड़ितों के बिजली बिल माफ हों
चंबल घाटी समग्र विकास आंदोलन के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुल्तान सिंह चौहान ने प्रदेश सरकार से बाढ़ प्रभावित गांवों के ग्रामीणों व किसानों के बिजली बिल माफ करने की मांग की है। चौहान ने बताया कि सरकार को बाढ़ पीड़ितों के बिजली बिल माफ कर दिए जाने चाहिए। इससे उन्हें आर्थिक तौर पर काफी राहत मिलेगी। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र भेजकर बिजली बिल माफ किए जाने की अपील की है।