इटावा। इटावा महोत्सव/ प्रदर्शिनी पंडाल में मंगलवार से दो दिवसीय विज्ञान मेला शुरू हुआ। जिसमें जनपद के 110 विद्यालयों के 1700 से अधिक बच्चों ने चलित व स्थिर मॉडलों को प्रदर्शित कर अपनी क्षमताओं का प्रदर्शन किया। कार्यक्रम का शुभारंभ जिलाधिकारी श्रुति सिंह ने पंडाल के मुख्य गेट पर फीता काटकर किया। उन्होंने मंच पर पहुंचकर सरस्वती प्रतिमा पर माल्यार्पण भी किया।
जिलाधिकारी ने कहा यह आयोजन अपने आप में ऐतिहासिक है। बच्चों ने जिस तरह वैज्ञानिक प्रतिभा का प्रदर्शन किया है, वह निश्चित तौर पर सराहनीय है।
आईआईटी के वैज्ञानिक केके वर्मा ने कहा कि बच्चों ने जिस तरह विज्ञान के प्रति अपनी इच्छा को जाहिर करने के लिए मॉडल प्रस्तुत किए वह सराहनीय हैं। उन्होंने धुएं को साफ करके शुद्ध वायु, जल संरक्षण पर आधारित मॉडलों की सराहना की। आईआईटी वैज्ञानिक डॉ. अश्वनी कुमार ने कहा बच्चों को अपनी दैनिक उपयोगिता में भी विज्ञान को शामिल करना चाहिए। अतिथियों ने बच्चों के मॉडलों का निरीक्षण करते हुए उनसे सवाल भी किए।
इस दौरान डीआईओएस राजू राणा, डिप्टी कलक्टर रितु प्रिया, बीएसए उमाकांत, डॉ. देवेंद्र कुमार सिंह, डॉ. मुकेश यादव व संयोजक डॉ. आनंद आदि उपस्थित रहे। मूल्यांकन टीम में डॉ. मतीन, डॉ. विष्णु, डॉ. आशीष त्रिपाठी, डॉ. अश्वनी कुमार शामिल रहे। संचालन प्रधानाचार्य असरा अहमद ने किया।
विज्ञान प्रदर्शिनी में परिषदीय स्कूलों के मॉडल भी आकर्षण का केंद्र रहे। इनमें ब्लाक ताखा के ग्राम अघीनी स्थित प्राथमिक विद्यालय के कक्षा चार के दो छात्र अंकुश और शैलेष ने ऐसा इलेक्ट्रानिक क्विज बोर्ड बनाया है, जिसके एक ओर 13 प्रश्र और दूसरी ओर उत्तर हैं। किस प्रश्र का उत्तर क्या है, इसे पता करने के लिए उसे हर एक उत्तर के ऊपर एक चिमटी को रखते जाते हैं और सही उत्तर पर वीप की आवाज से सही उत्तर का पता चल जाता है।
बातचीत के दौरान दोनों छात्रों ने इसका सारा श्रेय अपने शिक्षक आकाश गर्ग को दिया है, जिनके प्रयासों और उनकी मेहनत से यह मॉडल तैयार कर सके। पढ़ लिखकर क्या बनना पसंद करोगे के सवाल पर दोनों ने ही आईएएस बनने की बात की जाहिर की।
विज्ञान मेला में प्लास्टिक का माइक्रोस्कोप मॉडल प्रदर्शित करने वाली एसएस मेमोरियल सीनियर सेकेंडरी स्कूल सैफई की कक्षा आठ की वंशिका तोमर और आरती यादव ने बताया पहले लकड़ी का माइक्रोस्कोप बनाने का इरादा था, लेकिन प्लास्टिक का बनाना काफी आसान लगा। दोनों छात्राओं ने भी आईएएस बनना चाहती हैं।