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हत्यारे पति को उम्रकैद की सजा

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इटावा। कोतवाली क्षेत्र में करीब चार साल पहले हुए रमिता दुबे हत्याकांड में हत्या के बाद फांसी पर लटका देने का दोष साबित हो जाने पर अदालत ने सोमवार को पति को उम्रकैद की सजा सुनाई है। अभियुक्त बनाई गई सास साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दी गई। अपर सत्र न्यायाधीश कोर्ट नंबर एक विवेक त्रिपाठी ने दोषसिद्ध पर 50 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है।
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राज्य सरकार की ओर से मामले के पैरवीकर्ता सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता संजीव चतुर्वेदी ने बताया कि मैनपुरी जिले के खरगजीत नगर निवासी रमेश बाबू तिवारी ने बेटी की हत्या का आरोप लगाते हुए कोतवाली में तहरीर दी थी। बताया था कि उन्होंने पुत्री रमिता दुबे (31) की शादी शहर के मिटैटी टोला में आशीष दुबे से 29 जनवरी 2007 को की थी। शादी के बाद से बेटी को पति, सास, दो ननदें और ननदोई दहेज को लेकर प्रताड़ित करने लगे। 30 दिसंबर 2015 को उनको फोन पर सूचना मिली कि पुत्री ससुराल में पंखे से लटकी है। पत्नी व बेटों के साथ वे मौके पर पहुंचे। वहां पुत्री का शव डबल बेड के ऊपर पंखे से लटका था। गले में साड़ी का फंदा था। मुंह में रुमाल ठूंसा गया था और ऊपर से गमछा बंधा था।
कोतवाली पुलिस ने पति आशीष दुबे, सास, दोनों ननदों व ननदोइयों के खिलाफ धारा 302 व 498 में रिपोर्ट दर्ज की थी। विवेचना के बाद पुलिस ने पति व सास के खिलाफ आरोपपत्र प्रस्तुत किया था। अपर सत्र न्यायाधीश ने साक्ष्यों व गवाहों के बयानों के आधार पर आशीष दुबे को दोषी पाया और सजा सुनाई।
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