इटावा। धान की कटाई के दौरान पराली जलाने पर रोक लगाने के लिए किसानों को जागरूक किया जा रहा है। प्रशासन ने किसानों से पराली खेत में न जलाकर इन-सीटू क्रॉप रेजिड्यू मैनेजमेंट मशीनों से खेत में मिलाकर सड़ाने की अपील की है। इससे मिट्टी की उर्वरा शक्ति बढ़ने के साथ पर्यावरण भी स्वच्छ रहेगा।
उपकृषि निदेशक सतीश कुमार ने बताया कि फसल कटाई में इस्तेमाल होने वाले कंबाइन हार्वेस्टर के साथ सुपर स्ट्रा मैनेजमेंट सिस्टम, स्ट्रा रीपर, स्ट्रा रैक एवं बेलर या अन्य फसल अवशेष प्रबंधन यंत्र का प्रयोग अनिवार्य किया गया है। बिना सुपर स्ट्रा मैनेजमेंट सिस्टम के कंबाइन हार्वेस्टर चलता मिला तो उसे पूरी कटाई सीजन के लिए सीज कर दिया जाएगा। किसान पराली नजदीकी गोशाला में भी भेज सकते हैं। इसकी ढुलाई का खर्च मनरेगा या वित्त आयोग की निधि से वहन किया जाएगा।
दो ट्रॉली पराली गौशाला पहुंचाने पर किसान को एक ट्रॉली खाद भी दी जा सकती है। उन्होंने बताया कि पराली जलाने पर दो एकड़ से कम क्षेत्र के लिए पांच हजार, दो से पांच एकड़ तक 10 हजार और पांच एकड़ से अधिक क्षेत्र के लिए 30 हजार रुपये तक पर्यावरण क्षतिपूर्ति वसूली जाएगी। राष्ट्रीय हरित अधिकरण अधिनियम के तहत दोबारा उल्लंघन पर कारावास का भी प्रावधान है। (संवाद)
उपकृषि निदेशक सतीश कुमार ने बताया कि फसल कटाई में इस्तेमाल होने वाले कंबाइन हार्वेस्टर के साथ सुपर स्ट्रा मैनेजमेंट सिस्टम, स्ट्रा रीपर, स्ट्रा रैक एवं बेलर या अन्य फसल अवशेष प्रबंधन यंत्र का प्रयोग अनिवार्य किया गया है। बिना सुपर स्ट्रा मैनेजमेंट सिस्टम के कंबाइन हार्वेस्टर चलता मिला तो उसे पूरी कटाई सीजन के लिए सीज कर दिया जाएगा। किसान पराली नजदीकी गोशाला में भी भेज सकते हैं। इसकी ढुलाई का खर्च मनरेगा या वित्त आयोग की निधि से वहन किया जाएगा।
दो ट्रॉली पराली गोशाला पहुंचाने पर किसान को एक ट्रॉली खाद भी दी जा सकती है। उन्होंने बताया कि पराली जलाने पर दो एकड़ से कम क्षेत्र के लिए पांच हजार, दो से पांच एकड़ तक 10 हजार और पांच एकड़ से अधिक क्षेत्र के लिए 30 हजार रुपये तक पर्यावरण क्षतिपूर्ति वसूली जाएगी। राष्ट्रीय हरित अधिकरण अधिनियम के तहत दोबारा उल्लंघन पर कारावास का भी प्रावधान है। (संवाद)