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सैफई में शादी के बहाने समाजवादी परिवार के बीच चुनावी मंथन

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इटावा। अगले छह महीने के बाद होने वाले यूपी विधानसभा चुनाव की तैयारियों को लेकर समाजवादी पार्टी भी पीछे नहीं है। सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव की अगुवाई में सैफई में समाजवादी परिवार के बीच चुनावी रणनीति को लेकर गहन मंथन चला।
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नातिन दीपाली की शादी के मौके पर सैफई पहुंचे मुलायम ने पूर्व सीएम अखिलेश यादव और महासचिव प्रो रामगोपाल यादव से चुनाव को लेकर गहन मंथन किया।
वहीं रणनीति के तहत प्रसपा अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव के साथ भी बैठक की। राजनैतिक जानकारों का मानना है कि समाजवादी परिवार का यह चुनावी मंथन आने वाले दिनों में प्रदेश की राजनीति में नया गुल खिलाने वाला है।
मुलायम सिंह यादव जमीन से जुुड़े नेता हैं। उन्हें प्रदेश की राजनीति की नब्ज टटोलनी आती है। प्रदेश में जब भी चुुनाव हुए उनकी खासियत रही कि चुनावी जमीन सैफई अथवा इटावा में ही मिल बैठकर तैयार की गई।
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वर्ष 2012 के चुनाव की शुरूआत भी उन्होंने इटावा में सिविल लाइन स्थिति अपने आवास से क्रांति रथ पर सवार होकर की थी। इस चुुनाव में सपा को पूर्ण बहुमत मिला।
मुलायम ने मुख्यमंत्री की कुर्सी अपने बेटे अखिलेश यादव को सौंप दी। वर्ष 2017 के चुनाव में समाजवादी परिवार में चाचा भतीजे के बीच छिड़ी जंग के कारण वे चुनावी अभियान में सक्रिय नहीं हुए।
इस बार 2022 की तैयारी में अब फिर नेताजी पुरानी भूमिका में सामने आ रहे हैं। शनिवार को मुलायम सिंह यादव सैफई हवाई पट्टी से सीधे अपने आवास पर पहुंचे। यहां वे करीब 35 मिनट रुके।
अखिलेश यादव तो उनके साथ ही आए थे। आवास पर उन्होंने प्रसपा अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव से मुलाकात की। दोनों के बीच एकांत में वार्ता भी हुई। इसके बाद वे इटावा सिविल लाइन स्थित आवास पर आराम करने चले आए।
वहीं अखिलेश यादव सपा के चाणक्य माने जाने वाले महासचिव प्रो.रामगोपाल यादव से मिलने उनके सैफई आवास पर पहुंचे। दोनों नेताओं के बीच आधा घंटा से भी अधिक समय तक एकांत वार्ता हुई।
शादी के मौके पर सैफई का समाजवादी परिवार एकजुट दिखा। नेताजी के अलावा अखिलेश यादव, शिवपाल सिंह, धर्मेंद्र यादव, तेज प्रताप सिंह यादव, अंशुल यादव और अक्षय यादव एक दूसरे से आपस में मिले।
एक दूसरे का सम्मान किया। जिला पंचायत के चुनाव नतीजों से सपा काफी उत्साहित है। सपा को लगने लगा है कि सत्ता की राह अधिक कठिन नहीं है। इसके लिए हाल ही में अखिलेश यादव ने चाचा शिवपाल सहित सभी छोटे दलों से गठबंधन की बात भी कही है।
हालांकि सपा और प्रसपा के गठबंधन में अभी सीटों को लेकर संशय बना हुआ है। जसवंतनगर की सीट तो प्रसपा को देने की हरी झंडी मिल गई है। अब और कितनी सीटें दी जानी चाहिए इस बारे में नेताजी, अखिलेश और रामगोपाल के बीच मंथन होगा।
सैफई में शादी के बहाने चाचा भतीजे के बीच चल रही राजनैतिक खटास को दूर करने का एक और प्रयास होने जा रहा है। माना जा रहा है कि इस प्रयास में बिहार के पूर्व सीएम लालू प्रसाद यादव का परिवार भी बड़ी भूमिका निभाने जा रहा है।
यह राजनैतिक जुगलबंदी आने वाले विधानसभा चुनाव में भाजपा से दो-दो हाथ करने के लिए पूरी तैयारी के साथ मैदान में उतरेगी। चुनाव से पहले नेताजी की सक्रियता ने प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर से हलचल पैदा कर दी है।
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