गणना के दौरान अठखेलियां करती डॉल्फिन
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चकरनगर। डॉल्फिन को चंबल का जल खूब रास आ रहा है। डॉल्फिन का कुनबा पिछले साल की अपेक्षा बढ़ा है। जलीय जीवों की चल रही गणना के दौरान यह जानकारी सामने आई। हालांकि आधिकारिक आंकड़े फरवरी में जारी होंगे।
गंगा के साथ-साथ चंबल में भी डॉल्फिन मछली की अच्छी संख्या है। साफ पानी, मुफीद बहाव व ऑक्सीजन की प्रचुर मात्रा के चलते चंबल में उनकी संख्या बढ़ रही है। चंबल सेंक्चुअरी के डीएफओ दिवाकर श्रीवास्तव ने बताया कि अभी नदी में जलीय जीवों की गणना चल रही है। जो कई चरणों में पूरी होगी। पिछले साल हुई गणना में करीब 150 डॉल्फिन के जोड़े नदी में दिखे थे। इस बार 12-13 जोड़े बढ़ने का अनुमान है। डीएफओ ने कहा कि इसी तरह अगर चंबल में डॉल्फिन का परिवार बढ़ता रहा तो घड़ियाल, मगरमच्छों के साथ-साथ चंबल को डॉल्फिन नदी के नाम से भी पहचान मिल जाएगी।
डॉल्फिन स्तनधारी प्राणी है। इन्हें अकेले रहना पसंद नहीं है। ये 10 से 12 के समूह में रहती हैं। डॉल्फिन को सांस लेने के लिए हर 15 मिनट में सतह पर आना होता है। मादा डाल्फिन नर से बड़ी होती है। इनकी औसत आयु 28 साल है। डॉल्फिन एक बार में एक ही बच्चा देती है। प्रसव के कुछ दिन पहले गर्भवती डॉल्फिन को देखभाल के लिए पांच से छह मादा डाल्फिन उसके पास रहती हैं।
केंद्र सरकार ने पांच अक्तूबर 2009 में गंगा डॉल्फिन को भारत का राष्ट्रीय जलीय जीव घोषित किया था। गंगा में पाई जाने वाली डॉल्फिन एक नेत्रहीन जलीय जीव है। जिसकी सूंघने की क्षमता बड़ी तीव्र होती है। भारत में इनकी संख्या 2000 से भी कम है।