इटावा। पराली जलाने पर अंकुश हर हाल में लगाया जाए। यह निर्देश सोमवार को कलक्ट्रेट सभागार में बैठक करते हुए डीएम शुभ्रांत कुमार शुक्ल ने दिए। डीएम ने किसानों को सायंकालीन गोष्ठियों के माध्यम से जागरूक करने को कहा। उन्होंने सुपर एसएमएस युक्त कंबाइन हार्वेस्टर के उपयोग और पराली को गोशालाओं में पहुंचाने पर जोर दिया।
डीएम और सीडीओ संजय कुमार सिंह ने धान उत्पादक ब्लॉकों में जागरूकता के लिए पांच प्रचार वाहन रवाना किए। साथ ही पराली प्रबंधन के लिए गठित सचल दल के साथ बैठक कर अधिकारियों को जरूरी निर्देश दिए। डीएम ने किसानों से पराली नहीं जलाने की अपील करते हुए कहा कि फसल अवशेषों को डी-कंपोजर या कृषि यंत्रों की मदद से खेत में ही सड़ाएं।
इससे मिट्टी की उर्वरा शक्ति बढ़ेगी और पर्यावरण भी स्वच्छ रहेगा। उन्होंने निर्देश दिए कि कंबाइन हार्वेस्टर के साथ सुपर स्ट्रा मैनेजमेंट सिस्टम या अन्य उपयुक्त फसल अवशेष प्रबंधन यंत्र का इस्तेमाल अनिवार्य रूप से किया जाए। उपकृषि निदेशक सतीश कुमार ने बताया कि किसान पराली नजदीकी गोशाला में भी भेज सकते हैं। इसकी ढुलाई का खर्च मनरेगा या वित्त आयोग से वहन किया जाएगा। दो ट्रॉली पराली देने पर एक ट्रॉली खाद लेने की व्यवस्था भी बताई गई। पराली जलाने पर दो एकड़ से कम भूमि के लिए पांच हजार, दो से पांच एकड़ तक 10 हजार और पांच एकड़ से अधिक भूमि पर 30 हजार रुपये तक पर्यावरण क्षतिपूर्ति वसूली जा सकती है। (संवाद)