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Etawah News: डायलिसिस निशुल्क, आठ सौ का इंजेक्शन बाहर से खरीदकर लाते मरीज

Wed, 30 Sep 2026 12:32 AM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, इटावा
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फोटो 24: जिला अस्पताल में डायलिसिस करवाते मरीज। संवाद
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इटावा। संयुक्त जिला अस्पताल में निशुल्क डायलिसिस की सुविधा के बावजूद हर डायलिसिस में लगने वाला एरिथ्रोपोइटिन इंजेक्शन मरीजों को बाहर से खरीदना पड़ता है। बाजार में एक इंजेक्शन की कीमत 800 रुपये से अधिक है। ऐसे में डायलिसिस का एक रुपये में पर्चा बनने के बाद भी मरीज को हर माह तीन से पांच हजार रुपये का हर माह खर्चा उठाना पड़ता है। निशुल्क सुविधा के बाद भी गरीब मरीज इंजेक्शन खरीदने में कर्जदार हो रहे हैं।
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जिले में किडनी रोगियों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। यही वजह है कि हर माह जिले में एक हजार से 1200 डायलिसिस होती हैं। संयुक्त जिला अस्पताल में निशुल्क डायलिसिस के दावे तो किए जाते हैं लेकिन डायलिसिस कराने में मरीजों की जेब ढीली हो रही है। इसकी मुख्य वजह यह है कि डायलिसिस में प्रयोग किए जाने वाला एरिथ्रोपोइटिन इंजेक्शन मरीजों को हर बार बाजार से खरीदना पड़ता है।
एक इंजेक्शन की कीमत बाजार में अलग-अलग डोज के हिसाब से 800 या उसके अधिक रुपये का आता है। ज्यादातर मरीजों की माह में तीन से चार बार तक डायलिसिस हो रही है। ऐसे में मरीजों को हर बार खून बढ़ाने के लिए यह इंजेक्शन प्रयोग किए जाता है। शासन से इस इंजेक्शन की सप्लाई न होने के कारण मरीजों को तीन से पांच हजार रुपये तक का अतिरिक्त खर्चा उठाना पड़ता है।
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पड़ोसी जिले से भी डायलिसिस कराने आते हैं मरीज
संयुक्त जिला अस्पताल में जिला समेत आसपास जिलों मरीज डायलिसिस कराने के लिए आते हैं। इसमें इटावा से सटे औरैया व मैनपुरी तक के मरीज डायलिसिस कराने के लिए आते हैं। इसमें किराया खर्च करने के बाद भी मरीजों को इंजेक्शन समेत अन्य दवाओं पर रुपये खर्च करने पड़ते हैं।

खून बढ़ाने के लिए प्रयोग किया जाता है इंजेक्शन
अस्थि मज्जा (हड्डियों के भीतर के ऊतक जो लाल रक्त कोशिकाएं निर्मित करते हैं) को अधिक संख्या में लाल रक्त कोशिकाओं के निर्माण में मदद करता है। एपोइटिन अल्फा, ह्यूमन ग्लाइकोप्रोटीन हार्मोन के एक समान प्रकार से संबंध रखता है जिसे एरिथ्रोपोइटिन कहा जाता है। एपोइटिन अल्फा, लाल रक्त कोशिका के उत्पादन को बढ़ाता है।

मरीजों ने बयां किया दर्द
डायलिसिस कराने में हो गया कर्जा
पत्नी नीतू की पांच साल पहले किडनी खराब हो गई थी। उसका हर एक माह में चार डायलिसिस की जाती है। खून बढ़ाने के लिए दिए जाने वाला इंजेक्शन यहां नहीं मिलता है। इसको बाजार से खरीदना पड़ता है। एक इंजेक्शन 800 रुपये से अधिक आता है। डायलिसिस कराने के चक्कर में सगे संबंधियों पर कर्जा हो गया है।
-अजय कुमार, अजीतमल, औरैया।
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माह में पांच बार होती है डायलिसिस
पति की माह में चार से पांच बार डायलिसिस होती है। दो साल से डायलिसिस हो रही है। हर बार आयरन वाला इंजेक्शन बाजार से खरीदकर लाना पड़ता है। निशुल्क डायलिसिस के साथ यह इंजेक्शन मुफ्त मिले तो इसका मरीजों को ज्यादा लाभ मिले। सरकार को इस इंजेक्शन को उपलब्ध कराना चाहिए।-कल्पना, भरथना

15 साल से करा रहे डायलिसिस
15 साल से पति की डायलिसिस हो रही है। सप्ताह में दो बार डायलिसिस कराने आते हैं। खून बढ़ाने का इंजेक्शन में ही लाखों रुपये खर्च हो हो चुके हैं। रिश्तेदारों का भी कर्जा हो चुका है। निशुल्क योजना के बाद भी हर माह पांच से छह हजार रुपये डायलिसिस में खर्च हो जाते हैं।-फरीदा बेगम, कांशीराम कॉलोनी

एक बार डायलिसिस में खर्च होते 15 सौ रुपये
तीन साल से पिता की डायलिसिस हो रही है। माह में दो बार डायलिसिस कराने आते हैं। एक बार डायलिसिस कराने में 1500 रुपये से अधिक खर्च हो जाते हैं। हर बार बाजार से इंजेक्शन मंगवाया जाता है। यहां पूछने पर पता चला कि इस इंजेक्शन की सप्लाई नहीं होती है।-जयनेश, जसवंतनगर।

डायलिसिस सुविधा हमारे यहां निशुल्क है, लेकिन एरिथ्रोपोइटिन इंजेक्शन की सप्लाई शासन से नहीं होती है। ऐसे में डायलिसिस कराने वाले मरीजों को यह खरीदकर लाना पड़ता है। यह इंजेक्शन रक्त बनाने के काम आता है। इस इंजेक्शन को उपलब्ध कराने के लिए उच्चाधिकारियों को पत्र लिखा जा चुका है।
-डॉ. पारितोष शुक्ला, सीएमएस पुरुष जिला अस्पताल

फोटो 24: जिला अस्पताल में डायलिसिस करवाते मरीज। संवाद

फोटो 24: जिला अस्पताल में डायलिसिस करवाते मरीज। संवाद

फोटो 24: जिला अस्पताल में डायलिसिस करवाते मरीज। संवाद

फोटो 24: जिला अस्पताल में डायलिसिस करवाते मरीज। संवाद

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