पुराना शहर स्थित राधा बल्लभ मंदिर पर रगभरनी एकादशी का पर्व धूमधाम से मनाया गया। राधा तथा कृष्ण के साथ श्रद्धालुओं ने जमकर फूलों तथा रंग गुलाल से होली खेली। इस अवसर पर राधा कृष्ण का नयनाभिराम शृंगार किया गया। शृंगार को देखने के लिए देर रात तक लोगों का तांता लगा रहा।
रंगभरनी एकादशी के अवसर पर प्रत्येक साल मंदिर परिसर में कार्यक्रम का आयोजन किया जाता है। रविवार क ो आयोजित समारोह में रंगीली होली पर लोगाें ने जमकर रंग गुलाल उड़ाया। धार्मिक गीतों की स्वर लहरियाें पर महिलाएं तथा बच्चे थिरकते रहे।
जो श्रद्धालु बृज की लठ्ठमार होली में भाग लेने से वंचित रह गए, उन्हाेंने राधावल्लभ मंदिर आकर बृज की होली का आनंद लिया।
इस अवसर पर मंदिर परिसर में बृज का दृश्य साकार हो उठा। राधा वल्लभ मंदिर में होली का उत्सव वृंदावनधाम की तर्ज पर मनाया जाता है। यह पर्व वसंत पंचमी से शुरू हो जाता है और होली के बाद तक चलता रहता है। मंदिर के महंत गोस्वामी प्रकाश चंद्र महाराज के द्वारा बरसाने से अबीर व गुलाल लाकर भक्तों पर उड़ाया जाता है।
कार्यक्रम से पहले भक्तों के सहयोग से महंत जी ने राधा वल्लभ का शृंगार किया। सबसे पहले भक्तों ने अपने इष्ट देव के साथ होली खेली। इसके बाद आपस में होली खेलने में मस्त हो गए।
रविवार क ो रंगीली एकादशी पर दो कुंतल फूलाें से होली खेली गई। आसपास सभी लोग श्याम के रंग में रंगे हुए नजर आए। महिलाओं के द्वारा मंदिर में भजन संध्या का आयोजन किया गया। महिलाओं ने होली के गीतों पर जमकर नृत्य किया।