मिनी पीजीआई में भर्ती एक मरीज ने बीमारी से परेशान होकर शनिवार दोपहर को चौथी मंजिल से कूद गया। उसकी मौके पर ही मौत हो गई। युवक की मां का आरेाप है कि डाक्टर ने उसे डांटते हुए कह दिया कि तुम्हारे फेफड़े खराब है और तुम ठीक नहीं हो सकते। इस बात से वह क्षुब्ध हो गया था। वहीं पीजीआई प्रशासन ने इन बातों से इनकार किया है।
मैनपुरी जिले के बरनाहल थाना क्षेत्र के गांव हविलिया निवासी 22 वर्षीय मनोज कुमार पुत्र राधेश्याम शाक्य टीबी रोग से पीड़ित था। उसे नौ दिन पूर्व गंभीर हालत में पीजीआई के क्षय रोग विभाग में भर्ती कराया गया था। जहां उसका उपचार चल रहा था। शनिवार दोपहर को वह चौथी मंजिल स्थित वार्ड से कूद गया। नीचे गिरने से उसकी मौके पर ही मौत हो गई।
मरीज के चौथी मंजिल से छलांग लगाने की जानकारी मिलने पर पीजीआई प्रशासन में हड़कंप मच गया। जानकारी मिलने पर सीओ सैंफई निर्मल चंद्र विष्ट के अलावा एसओ महेशवीर सिंह भी मौके पर पहुंच गए। वही जानकारी मिलने पर कुलपति डा. टी. प्रभाकर के अलावा अन्य अधिकारी भी मौके पर पहुंचे और छानबीन की। इस संबंध में मनोज की मां गायत्री देवी ने आरोप लगाया कि उसके पुत्र का उपचार करने वाले डाक्टर ने उससे कह दिया कि उसके फेफड़े पूरी तरह से खराब हो चुके हैं। इससे उसका बचाना अब मुश्किल है। इस बात से क्षुब्ध होकर उसके पुत्र ने चौथी मंजिल से कूदकर अपनी जान दे दी।
इधर, डा. टी. प्रभाकर ने बताया कि मरीज काफी समय से मादक पदार्थ का सेवन कर रहा था। इसी के कारण वह टीबी के रोग से पीड़ित हो गया। उसे गंभीर हालत में पीजीआई में भर्ती कराया गया था। उपचार के दौरान डाक्टराें ने उसे सही करने का प्रयास किया। फिर भी मरीज चोरी छिपे मादक पदार्थ का सेवन कर लेता था। इससे उस पर दवा का असर नहीं हो रहा था। हो सकता है कि डाक्टर ने इस पर उसे कुछ कह दिया हो। डाक्टर का प्रयास मरीज को सही करने का होता है। किसी की मंशा मरीज को नुकसान पहुंचाने की नहीं होती है। पुलिस ने शव को कब्जेे में लेकर उसे पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। मनोज चार भाइयों में सबसे छोटा था उसके पिता खेती किसानी करते हैं।